भोपाल : दशनाम गोस्वामी समाज द्वारा सामाजिक एकता स्थापित करने हेतु राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

भोपाल ,मध्यप्रदेश- संपूर्ण भारत के दशनाम गोस्वामी समाज द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक एकता स्थापित करने हेतु दो दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी भोपाल में दशनाम गोस्वामी समाज द्वारा आयोजित की गई । आयोजन सिद्धि विनायक गार्डन में रखा गया। बैठक में राष्ट्रीय सामाजिक एकता के लिए सभी ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।



प्रथम चरण में श्री शंकराचार्य सनातन दशनाम गोस्वामी अखाड़ा, दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चंद गिरि द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे के अलावा विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज संगठन के राष्ट्रीय विधि सलाहकार एड शंकर गिरि,देवास, विशिष्ट अतिथि जगद्गुरु दशनाम गोस्वामी समाज के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य महंत केवल भारती , छत्तीसगढ़, अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा के प्रदेश प्रभारी  राजेन्द्र भारती, इंदौर, राष्ट्रीय गोस्वामी दशनाम महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय गिरि, उड़ीसा, विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.आर. गिरि, गुजरात, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामेश्वर गिरि, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय सचिव मदन पुरी, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष वीरेन्द्र गिरि, धर्मराज गिरि, राष्ट्रीय सचिव सतीश गिरि, इंदौर, अखिल भारतीय गोस्वामी सभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री लक्ष्मण गिरि, भोपाल, अखिल भारतीय दशनाम गोस्वामी समाज के राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेन्द्र भारती, महंत शिव गिरि, इंदौर, महंत नीरज गिरि, उज्जैन, प्रदेश अध्यक्ष गोवा, मनोज गिरि,श्मनीष गिरी, ब्रह्मपाल गिरि, दिल्ली जैसे महानुभाव मंच पर विराजमान थे।



कार्यक्रम का शुभारंभ आदिगुरु शंकराचार्य  के पूजन एवं वैदिक मंत्रों के साथ स्वस्तिवाचन के साथ किया गया।  मंच का संचालन कर रहे प्रदेश प्रवक्ता महंत राजेश गिरि ने कार्यक्रम का विषय राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक एकता स्थापित करना एवं मुख्य बिंदु राष्ट्रीय एकता में बाधक,  कारण एवं उनके निवारण, समाधान बिंदुओं से अवगत करवाते हुए, प्रथम उद्बोधन के लिए महंत नानक गिरि को आमंत्रित किया, जिन्होंने समाज के प्रति अपने विचार एवं अपने संगठन के बारे जानकारी दी, राष्ट्रीय एकता के लिए शिक्षा एवं संस्कारों पर जोर देते हुए एवं समर्थन करते हुए उन्होंने सबसे पहले अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के लिए भी अपने को तत्पर बताया, इनके पश्चात आर आर गिरि, अध्यक्षता कर रहे शंकर गिरि, एवं मंच पर विराजमान सभी संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए।



 सभी ने एक स्वर में राष्ट्रीय एकता के लिए अपने आपको एवं अपने संगठनों को समर्थन में एवं आवश्यकता पड़ने पर अपने पद से त्यागपत्र की बात कही। अभय गिरि ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में समाज के प्रति अपने विचार एवं सर्व प्रथम पद त्याग की बात कही। सबसे संक्षिप्त उद्बोधन मनोज गिरि गोवा का रहा, जिन्होंने कम शब्दों में सारगर्भित बात कही, आचार्य महंत केवल भारती ने उचित समय सीमा में अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्वरचित रचना प्रस्तुत की, जिनकी उपस्थित महानुभावों ने जोरदार करतल ध्वनि से स्वागत एवं सराहना की।


विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज संगठन के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष वीरेन्द्र गिरि ने अपने संक्षिप्त एवं सारगर्भित उद्बोधन में एक राष्ट्रीय कार्यसमिति का सुक्षाव दिया, जिसमें सभी संगठनों की उपस्थिति हो और एक कामन मिनिमम एजेंडा हो, जो बहुत उचित एवं व्योहारिक था, जो किया जा सकता है। रामेश्वर गिरि ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोरंजन गिरि की ओर से संगठन का पक्ष रखते हुए एवं समर्थन करते हुए मनोरंजन गिरि द्वारा त्यागपत्र देने की बात कही।
 लक्ष्मण गिरि ने भी अपने संगठन के प्रतिनिधि रूप में अपने विचार व्यक्त किए एवं अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण पर्वत की ओर से राष्ट्रीय एकता के लिए समर्थन एवं त्यागपत्र देने की बात कही, राष्ट्रीय स्तर के कवि विजय गिरि ने भी कविता के माध्यम अपने विचार व्यक्त किए।


आयोजन के मध्य में छत्तीसगढ़ के आचार्य महंत केवल भारती को सीहोर मंडल के निशान धारी महंत संतोष यति द्वारा धर्म ध्वजा प्रदान कर धर्म ध्वजा धारी महंत की उपाधि एवं मंच पर उपस्थित सभी संत-महंत एवं दशनाम गोस्वामी समाज के महानुभावों ने शाल ओढ़ाकर एवं श्रीफल भेंटकर कर सम्मानित किया गया। 
 सभी अतिथियों ने आयोजन की भरपूर प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे ही आयोजन किये जाने की बात कही, जिसके माध्यम से भिन्न भिन्न प्रदेशों एवं भिन्न भिन्न संगठनों के पदाधिकारी आपस में एक-दूसरे से परिचित होकर, सद्भावना के साथ समाज की एकता के लिए आगे आएं।


इस संपूर्ण आयोजन के सूत्रधार एवं मुख्य व्यवस्थापक मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष महंत रूपेश गिरि थे । जिन्होंने निस्वार्थ भाव से ही अपना सामाजिक दायित्वों का निर्वहन किया। वह मंच से दूर रहकर जनता के बीच बैठकर सभी के उद्बोधन को ध्यान से सुनते रहे, जैसा कि अधिकांश लोगों के मन में इस बात की आशंकाएं थी कि जब-जब भी कोई व्यक्ति अपना समय एवं पैसा खर्च करके कोई आयोजन करता है तो उसके पीछे निश्चित ही कोई स्वार्थ रहता है और संभवतः नया संगठन बनाकर स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष बनता है।
किंतु महंत रूपेश गिरि एवं उनकी टीम ने इस अवधारणा को गलत सिद्ध करते हुए, संपूर्ण भारत में समाज को एक संदेश दिया है कि, निस्वार्थ भाव से भी समाज की सेवा की जा सकती है और वास्तव में वही सेवा धन्य है। 
 


इस आयोजन की व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भोपाल जिला अध्यक्ष पंडित शंभू गिरि , युवा प्रदेश सचिव अमरीश  पुरी भोपाल, मनोज गिरि , महंत वीरेन्द्र वन, जिला अध्यक्ष रायसेन शंभू गिरि, शिव गिरि मंडीदीप।  महेश पुरी, महंत जगदीश पुरी , आनंद गिरि , आदित्य पुरी, उमेश गिरि, राजेश भारती होशंगाबाद। जिला अध्यक्ष विदिशा ओमप्रकाश गिरि, भगवंत गिरि,  ब्रजेश गिरि, मनोज गिरि, सीहोर से महंत कैलाश यति, महंत संतोष यति, अमर पुरी, इंदौर से राजेन्द्र भारती, महेश गिरि, रामनारायण पर्वत आदि रहे।


आयोजन में सम्मिलित होने के लिए भोपाल के साथ ही सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, आगर मालवा, देवास, शाजापुर, उज्जैन, इंदौर, खरगौन, होशंगाबाद, गुना, अशोक नगर आदि जिले से उल्लेखनीय उपस्थिति रही । मध्य प्रदेश के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात एवं दिल्ली ।


जिन संगठनों से प्रतिनिधित्व हुआ वह निम्नलिखित हैं.
1.विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज संगठन।
2.श्री शंकराचार्य सनातन दशनाम गोस्वामी अखाड़ा
3.जगद्गुरु दशनाम गोस्वामी समाज।
4.राष्ट्रीय गोस्वामी दशनाम महासभा।
5.अखिल भारतीय दशनाम गोस्वामी समाज।
6.अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा
7.अखिल भारतीय गोस्वामी सभा।


 


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