150वीं जयंती पर विशेष "महात्मा गांधी युग प्रवर्तक"


वर्तमान युवा पीढीं पूज्य बापू के नाम को मोहन दास करमचंद गांधी के नाम से शायद नहीं  जानते होंगे।वे राष्ट्र पिता , बापू और महात्मा गांधी के नाम से अधिक जानें और पहिचाने जाते रहे। दो अक्टूबर को उनका जन्म दिवस गांधी जयंती के नाम से प्रतिवर्ष मनाया जाता है। सत्याग्रह के अमोघ शस्त्र से भारत मां को आजादी दिलाने और अंग्रेजों के कुटिल काल का नाश महात्मा गांधी जी था।


     कभी हम गाया करते थे।


देदी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल।
साबर मती केसंत तूने कर दिया कमाल।।


लेखक - विजय सिंह बिष्ट


भले आज का युवा ये नहीं समझ पाया है कि चरखे से आजादी मिलती है। वह चक्र देश के पुरोधाओं नेता जी सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, शाहनवाज,मेजर जनरल लोकनाथन, ढिल्लन,सहगल, शत्रुनाशी लेफ्टिनेंट अब्दुलाखान,वीर हिंद कप्तान मुहम्मद आरफखान,मेजर पारसराम थापा गोरखा सैन्य इन्चार्ज,मेजर लक्ष्मी स्वामी नाथन जिन्होंने भारतीयों की स्वतंत्रता के प्रतिज्ञा की थी।


स्व0रासबिहारी बोस कर्नल हौसले,डा0धर्मवीर,डा0सुनील बोस, सतीश चंद्र बोस, तथा अठ्ठारवीं गढ़वाल राइफल के सैनिक जिन्होंने पठान विद्रोहियों पर हथियार चलाने से इन्कार कर दिया था ,वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली, और अनेक वलिदानी सैनिकों , सरदार भगतसिंह चन्द्र शेखर आजाद, आदि सुदर्शन चक्रो के बल आजादी मिली। श्रेय हमेशा सूत्रधार और जन नेता को मिलता है।


26जनवरी1930ई0 को पूर्ण स्वतंत्रता की मांग अग्रेजों द्वारा ठुकरा दी गई 172सदस्यों ने व्यवस्थापिका सभाओं से त्यागपत्र दे दिया,दमन चक्र के फलस्वरूप सुभाष चन्द्र बोस और साथियों को सश्रम कारावास दे दिया गया। नमक आंदोलन
सरदार भाई पटेल और गांधी जी दण्डी ग्राम में नमक आंदोलन की शुरूआत करने जा रहे, उन्हें बंदी बना दिया गया। गुजरात में बिद्रोह की चिनगारी सुलक गयी 75000किसान साबरमती में प्रणबद्ध हो गये। जलियांवाला बाग की स्मृति में बापू को नमक आंदोलन तोड़ना पड़ा। सदस्यता अभियान सारे देश में चार आने की सदस्यता ली जाती थी मेरे पिता स्व0 लाला जगतसिंह भी सदस्य थे मेरे पास उसकी रसीदें हैं जो1931ई0तक की हैं।


जिन लोगों की नामावली ऊपर वर्णित है मेरे पास उनका एलबम है। मुक्तियज्ञ काव्य संग्रह  सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित हमें इन्टर मीडिएट में पढ़ाया जाता था जो माध्यमिक  शिक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित थी। उसमें गांधी जी की तपस्या और स्वतंत्रता प्राप्ति का अनूठा काव्य मधुरस भरा था। आज के साहित्य से बिल्कुल अलग,उसमें हमें सत्यता और त्याग के दर्शन होते थे।हो सकता है हमारी सोच और दुनिया छोटी रही हो। स्वतंत्रता लेना,उससे लड़ना और स्वतंत्र होकर राज करने में अंतर है


देश आज भी वही है भौगोलिक स्थिति नहीं बदलती हैं सीमाओं में फेर बदल होता है किन्तु भावनाओं में अंतर होना अहितकर हो सकता है। आजादी ले लेने पर बापू जी भी चाहते थे कांग्रेस का विलीनीकरण हो।उन्हें भी राष्ट्र पिता बनाया जा सकता था। लेकिन वे बापू और राष्ट पिता बने। महात्मा की संज्ञा देना अवर्णिय था।150वीं जन्म शताब्दी बापू के भारत को शक्तिशाली , सौभाग्यशाली गरिमामय बनाये। बापू के निश्छल जीवन पर देश को  सुहृदय  श्रद्धाज्जलि के साथ श्रद्धासुमन अर्पित करने चाहिए।
।।जन्म दिवस जन्म शताब्दी हम मनायें।
सच्ची श्रद्धा से आओ हम सुमन चढ़ायें।।