दीपावली ज्योतिर्मय महोत्सव है


दीपावली ज्योतिर्मय महोत्सव है। यह हमारे भीतर जितना लालित्य का उत्सव है उतना ही हमें वाह्य आनंद की भी अनुभूति कराता है। जहां सदा सत्य का उजाला हो वही साहस  निष्ठाऔर ज्ञान का उत्सव ही उत्सव होता है। दीपावली प्रकाश एवं अंधकार का मनोरम समन्वय है इसका अर्थ है उसमें अग्रगामिता का भाव निहित है।हम सदियों से इस पर्व को इसी आधार पर मनाते चले आ रहे हैं।सत्य पर असत्य की विजय, अंधकार पर प्रकाश की विजय माना जाता है।


दीपावली समाज व व्यक्ति के जीवन के अनगिनत आयामों को नया रूपांकन प्रदान करता है। वर्तमान समय जिस तरह से नकारात्मक और संवेदनशीलता का पर्याय बना हुआ है उसमें स्नेह के रंगों को समाहित करने की आवश्यकता है। प्रेम से ही स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है यह ऐसा प्रर्यावरण बनाता है जो वास्तविक कलात्मकता की दीवाली ला सकता है।
 मौसम आनंदायक कहा जा सकता है जो न गरमी का है नहीं सर्दी का। दीपावली पर मिट्टी के इतने रंग उभर कर आते हैं शायद ये पहले दिखाई नहीं देते, भिन्न भिन्न आकार के दीये,हाथी घोड़े, लक्ष्मी की प्रतिमाएं कलाकारों की कला को जीवंत कर डालती है


अच्छा हो कला के इन हाथों को सक्षम और संरक्षण दिया जाय। आजीविका की खोज में दौड़ रहे युवाओं को यदि हम स्वावलंबी बना सकें तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। सभी धर्मों , जातियों , लिंगों और प्रांतीय, भाषा ओं की दीवार तोड़ कर ऐसा सामंजस्य स्थापित करें कि विकास की धारा बहने लगे। अतीत के खंडहर को भर कर नव सृजन स्वीकार करना ज्ञान के दीपक जलाना है
 जिस प्रकार दीपक को शुद्ध घृत एवं स्वच्छ रुई की बाती से आलोकित किया जाता है उसी प्रकार जब तक हम निर्मल मन से मां भारती के लिए तन मन धन से आत्म समर्पण नहीं कर लेते,तब तक दीपावली धनतेरस, स्वतंत्रता दिवस केवल मात्र उत्सव के नमूने ही कहे जायेंगे। यह प्रतिवर्ष आकर चले जाते रहेंगे।


त्यौहार हमें संदेश देकर जाते हैं। चरित्र निर्माण, देशप्रेम,मातृरक्षण, स्वावलंबन,वलिदान, यही ज्ञान के दीपक और चक्षु हैं। हजारों रुपयों की लड़ियां, फुलझड़ी पटाखे जला देने से दीवाली में लक्ष्मी की उपलब्धि सार्थक रूप में नहीं होगी।
  दीपावली समस्त भारत वासियों के मन में ज्ञान का आलोकित प्रकाश भरे, इसी कामना के साथ शुभ दीपावली, हार्दिक बधाई।