हैंड्स-ऑन अनुभव और आत्मविश्वास की कमी से नहीं मिल पाते महिलाओं को टेक जॉब्स 

मुंबई,:उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इंजीनियरिंग प्रतिभा और विचारों को पोषित करने के उद्देश्य से काम करने वाली भारत की सबसे बड़ी आईपी-संचालित इनक्यूबेशन लैब्स में से एक ब्रिजलैब्ज सॉल्यूशंस एलएलपी ने हाल ही में नौकरी की तलाश के दौरान महिलाओं और पुरुषों के सामने आने वाली समस्याओं की तुलना करने के लिए सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण पूरे भारत में 2300+ प्रतिभागियों के बीच कराया गया। सभी प्रतिभागी 2019 में या उससे पहले इंजीनियर स्नातक बने थे। इनमें 58% पुरुष और 42% महिलाएं थीं। प्रतिभागी बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद और मुंबई के साथ-साथ दिल्ली, कोयम्बटूर, चेन्नई, कोलकाता, जयपुर और औरंगाबाद जैसे शहरों से थे।



सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला कि कोडिंग का हैंड्स-ऑन अऩुभव न होने (40%) और कम आत्मविश्वास (33%) के कारण अधिकांश तकनीकी प्रतिभागियों को टेक नौकरियों को हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।  पुरुषों के लिए यह आंकड़े क्रमशः 38% और 31% है। प्रतिभागियों में, पुरुषों (31%) की तुलना में कम महिलाओं (27%) ने कहा कि उन्हें उभरते हुए तकनीकी प्लेटफार्मों और भाषाओं की अच्छी जानकारी नहीं थी, जिनकी जानकारी साक्षात्कार और टेस्ट में सफल होने के लिए आवश्यक थी। यह इस तथ्य का संकेत है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्ञान अधिक है, लेकिन उनके पास व्यवहारिक अनुभव (हैंड्स-ऑन अनुभव) की कमी है।


इस तथ्य की पुष्टि ब्रिजलैब्ज के कोडिंग कैफे टेस्ट के निष्कर्षों से भी होती है जो भारतभर के 17 शहरों में 1 लाख से अधिक इंजीनियरों के बीच कराया गया। यहां पुरुषों के अंकों की तुलना में महिलाओं ने 4% अधिक अंक हासिल किए। इससे स्पष्ट हुआ कि पुरुषों की तुलना में वे बेहतर कोडिंग कर सकती हैं, लेकिन आत्मविश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक प्लेटफार्म की आवश्यकता है।


ब्रिजलैब्ज के संस्थापक नारायण महादेवन ने सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर कहा, “नौकरी हासिल करने की कोशिश करते समय इंजीनियरिंग प्रतिभा के सामने आने वाली चुनौतियों का मूल कारण पारंपरिक संस्थानों में अक्सर इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का सिद्धांत-उन्मुख / या पुराना होना होता है। इसके अलावा भले ही वे उभरती तकनीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करते हों, लेकिन इस समस्या का हल इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कोर्स पूरी तरह बदलने में निहित है। यह इस तरह होना चाहिए कि पाठ्यक्रम तकनीकी ट्रेंड्स के साथ गतिशील बने रहे। हमारे निष्कर्षों से पता चला कि विशेष रूप से महिलाएं इस क्षेत्र में सही ज्ञान से लैस हैं, लेकिन उन्हें अपनी क्षमताओं को सुधारने के लिए व्यवहारिक पक्ष पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। "


उन्होंने आगे कहा, "हमारे देश में इंजीनियरिंग प्रतिभा की सच्ची क्षमता का लाभ उठाने प्रायोगिक शिक्षा महत्वपूर्ण है। न केवल उन्हें रोजगार योग्य बनाने में बल्कि उन्हें नौकरी पर पहले दिन से सक्रिय योगदानकर्ता बनाने में। ब्रिजलैब्ज में यह हमारा निरंतर प्रयास है। हमारे सर्वेक्षणों के निष्कर्षों के साथ हम इकोसिस्टम के अन्य हितधारकों को व्यवहारिक प्रदर्शन पर केंद्रित समान फॉर्मेट पेश करने को प्रोत्साहित करने की उम्मीद करते हैं।"


2016 में अपनी स्थापना के बाद से ब्रिजलैब्ज ने अपने मेकर प्रोग्राम के जरिये रोजगारपरक बनाने के लिए 1100+ से अधिक कुशल इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने में सफलता पाई है। इन इंजीनियरों को थॉट्सवर्क्स, बुकमायशो, अर्बन लैडर, यात्रा, फुलर्टन और कैपजेमिनी जैसी पार्टनर कंपनियों में मौका मिला है, जो देश में 200+ टॉप कंपनियों के नेटवर्क का हिस्सा हैं। ब्रिजलैब्ज को भरोसा है कि वित्त-वर्ष 2020-21 के अंत तक शीर्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों में 2,500 इंजीनियरों को कुशल बनाने और नौकरी पर रखने के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। कंपनी सक्रिय रूप से कंपनियों, लर्निंग प्लेटफार्मों और विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी तलाश रही है, जो भारत के टैलेंट पूल में स्किल की कमियों को दूर करने के अपने मिशन पर आगे बढ़ रहे हैं।