शत् शत् नमन वीर जवानों को



विजय सिंह बिष्ट 


उन शहीदों को नमन।
जिनका उजड़ा  चमन।
जिनकी रोती माताएं।
सिंदूर मिटाती विधवाएं।
जिनके अनाथ हुए बच्चे।
जो हैं मातृभूमि के सेवक सच्चे।
शत् शत् नमन बीर जवानों को।


जिनके गर्म लहूं के छीटें,
साहस की तहरीर बने,
शौर्य गाथाओं की प्राचीर बने।
भारत के हर दिल के वासी,
चाहे मन में छाई हो उदासी।
बदला इसका लेके रहेंगे,
सौ सौ जन्म लेके रहेंगे
वीर जवानों की कुर्बानी ने,
मातृभूमि का मान रखा,
नींव में अपनी लाशें बिछा दी,
ऊपर अपना हिंदुस्तान रखा।
*शत् शत् नमन बीर जवानों को,
उनकी बीरता और अभिमान को।