पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी
नयी दिल्ली - स्वाबलंबन ट्रस्ट साहित्यिक  प्रकोष्ठ  (स्वावलंबन" शब्द सार") के द्वारा भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी  वाजपेयी  की पुण्यतिथि के अवसर पर उनको श्रद्धांजली अर्पित करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर ऑनलाइन का०य गोष्ठी का आयोजन किया गया , जिसमें देश के विभिन्न साहित्यकारों की सहभागिता रही |कार्यक्रम की अध्यक्षता मेघना श्रीवास्तव राष्ट्रीय अध्यक्षा द्वारा की गई।


 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुरेखा शर्मा की उपस्थिति रही၊ कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली प्रान्त की अध्यक्षा डाॅ ममता सोनी के द्वारा माँ शारदे का माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ  किया गया ၊  दिल्ली प्रांत संयोजिका  (स्वावलम्बन शब्द सार ) रचना निर्मल  द्वारा माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई एवम् कुशल मंच संचालन किया गया। आमंत्रित कलमकारों ने अपनी रचनाओं के द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री तथा सुप्रसिद्ध कवि अटल बिहारी वाजपेई को श्रद्धांजली अर्पित की। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय अध्यक्षा  मेघना श्रीवास्तव,राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीरेंद्र गौड़, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतुल श्रीवास्तव राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनय खरे ,राष्ट्रीय संयोजिका सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ममता श्रीवास्तव ,राष्ट्रीय संयोजिका साहित्य प्रकोष्ठ परिणीता सिन्हा ,समाज सेवी अर्चना चित्रा ,हरियाणा प्रदेश संयोजिका स्वावलम्बन शब्द सार कमल धमीजा आदि पदाधिकारियों की सहभागिता रही व सभी ने काव्य पाठ कर देश रत्न अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।


 

वरिष्ठ साहित्यकार तथा समीक्षक सुरेखा शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेई  की कविताओं का पाठ कर गोष्ठी को एक अलग रंग दिया। वाजपेई जी की  कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ी थी---ऊंचे पहाड़ पर पेड़ नहीं लगते पौधे नहीं उगते ने घास ही जमती है जमती है सिर्फ बर्फ
जो कफन की तरह सफेद मौत की तरह ठंडी होती है।
मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना
गैरों को गले न लगा सकूं
इतनी रुखाई
कभी मत देना।



 

राष्ट्रीय अध्यक्षा मेघना श्रीवास्तव ने सफल गोष्ठी की बधाई देते हुए स्वावलंबन ट्रस्ट की गतिविधियों के विषय में भी बताया। मुख्य अतिथि सुरेखा शर्मा ने सफल गोष्ठी की हार्दिक बधाई देते हुए स्वावलंबन के प्रयासों की सराहना की तथा उसके उज्जवल भविष्य की कामना की। कलमकारों द्वारा पठित रचनाओं के कुछ अंश:




डॉक्टर मोना सहाय
‘संवेदना शब्द मात्र और मनुष्य संवेदनाविहीन हो गए
हाँ हम आज बहुत सभ्य हो गए !!”
लता सिन्हा ज्योतिर्मय
“सत्य को स्वीकार कर, परंपरा को प्यार कर
विजय की घोषणा किए, मैं स्वयं का शीश वार कर”
शालिनी तनेजा
“राम -सिया ने अलग-अलग हो कर्तव्य सारे पूर्ण किए
फिर राम को प्यारी हो गई सीता और राम सिया की राह चले”
कमल धमीजा
“मिलकर गले तुमसे जा रहा हूँ मैं
वादा देश से अपने निभा रहा हूँ मैं”  
सीमा सिंह
“कविता पुरुष और प्रकृतिअगर शाश्वत शिव बनोगे
पार्वती शिष्या बनेगीतुम्हारा अनुसरण करेगी”
निवेदिता सिन्हा
“क्यों मनाएँ हम दीपावली ? 
जब तम रात्रि न मनाई जाती”  
परिणीता सिन्हा                
"कहने को उनकी काया मिट गयी , पर मेरे नाम से जुड़े मेरे पिता मुझमें ही बस गये ၊"
ममता सोनी
"इन खौफ भरी हवाओं का असर कैसा है ,
बंद दरवाजे में यह मौत का डर कैसा है ।"
  रचना निर्मल
“भारत माँ आज हमसे पूछ रही हैकौन हो तुम
आखिर कौन हो तुम किसके मोहरे हो ?”
सभी ने कार्यक्रम के सफल संयोजन एवं  संचालन के लिए ममता सोनी एवं रचना निर्मल को बधाई प्रेषित की।  कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय संयोजिका ( स्वावलंबन शब्द सार) परिणीता सिन्हा ने सभी उपस्थित जनों का धन्यवाद किया तथा भविष्य में इसी प्रकार के सहयोग  की आशा जताई।