प्रणेता साहित्य संस्थान,दिल्ली द्वारा ऑनलाइन जश्ने-आज़ादी और पुस्तक विमोचन समारोह

नयी दिल्ली - प्रणेता साहित्य संस्थान,दिल्ली द्वारा ऑनलाइन जश्ने आज़ादी काव्य गोष्ठी  और पुस्तक विमोचन का सफल आयोजन संस्थान के संस्थापक एवं महासचिव एस जी एस सिसोदिया के मार्गदर्शन और सक्रिय प्रयासों  से सफलता पूर्वक  संपन्न हुआ,जिसमें विभिन्न राज्यों के रचनाकारों ने अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं से समां बांध दिया।  कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं नीतिका सिसोदिया  द्वारा माँ शारदे की वंदना तथा अतिथियों  द्वारा माल्यार्पण  के साथ हुआ।



सरस्वती वंदना के पश्चात संस्थान के संस्थापक और महासचिव एस जी एस सिसोदिया  ने अपने  सभी उपस्थित साहित्यकारों को शुभकामनाएँ प्रेषित की। यह गोष्ठी  प्रतिष्ठित कवि डाक्टर रामनिवास इंडिया की अध्यक्षता में संपन्न  हुई। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध कवि एवं गज़लकार राजेन्द्र 'राज निगम  ने अपनी गरिमामय  उपस्थिति से मंच को सुशोभित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में जानी मानी कवयित्री श्रीमती इन्दु 'राज' निगम और कहानीकार मीनू त्रिपाठी उपस्थित थीं।  प्रणेता साहित्य संस्थान की इस काव्य गोष्ठी का संचालन सुप्रसिद्ध समाजसेविका और शिक्षाविद शकुंतला मित्तल ने कुशलता से किया। सभी कवियों ने अपनी विभिन्न प्रस्तुतियों से देशप्रेम और वीर रस को  मूर्तिमान कर काव्य गोष्ठी की शाम को यादगार बना दिया। 



इस आयोजन का मुख्य आकर्षण प्रतिष्ठित कवयित्री पुष्पा शर्मा कुसुम की पुस्तकें 'सवालों का समन्दर' और 'श्याम दोहावली' और लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार और कहानीकार एस जी एस सिसोदिया के उपन्यास 'वह' और कहानी संग्रह 'धुआँ धुआँ ज़िन्दगी' रहा। एस जी एस सिसोदिया के इससे पूर्व 4 कहानी संग्रह ,1लघुकथा संग्रह और 2 उपन्यास साहित्य जगत में अपनी धूम मचा चुके हैं। सर्वप्रथम लेखक द्वय ने अपनी दोनों पुस्तकों के विषय में सारगर्भित संक्षिप्त परिचय दिया। तत्पश्चात प्रणेता साहित्य संस्थान की अध्यक्षा सुषमा भण्डारी ,उपाध्यक्ष शकुंतला मित्तल,सचिव भावना शुक्ल ,कोषाध्यक्ष चंचल पाहुजा और कार्यकारिणी सदस्यों में सरिता गुप्ता और संजय शाफ़ी ने पुस्तकों की समीक्षा करते हुए लेखकों को बधाई दी।


लेखिका पुष्पा शर्मा कुसुम की 'श्याम दोहावली' में कृष्ण की भक्ति से सराबोर 700 दोहे हैं ,जो भाव और भाषा,छंद,अलंकार के संयोजन से भक्ति रस से पाठक के हृदय को आप्लावित करने में पूर्णतः सक्षम हैं।भक्ति साहित्य में 'श्याम दोहावली' का सदैव अक्षुण्ण स्थान रहेगा। लेखिका की दूसरी पुस्तक 'सवालों का समन्दर' विविध विषयों को समेटे काव्य संकलन  है।इसमें सामाजिक सरोकार का प्रत्येक चित्र और समाज को गढ़ कर उसे नव रूप देने की लेखिका की गहरी जीवन दृष्टि प्रशंसनीय है।
उपन्यासकार और कहानीकार एस जी एस सिसोदिया जी का उपन्यास 'वह' किन्नर समुदाय की आपबीती व्यथा और संवेदनाओं को उकेरता ऐसा उपन्यास है,जिसमें लेखक का गहरा शोध और सामाजिक चिंतन एक सुदृढ़ कथानक में रोचक,सरल और सरस रूप में बंधा दिखता है।यह उपन्यास समाज के आम व्यक्तियों की किन्नर समुदाय के प्रति उपेक्षा ,घृणा और नकारत्मकता को सकारात्मकता में बदल उनके प्रति संवेदनशीलता जागृत कर उन्हें समाज में सम्मान दिलवाने की पहल के रूप में बहुत ही प्रशंसनीय है।


लेखक सिसोदिया की दूसरी पुस्तक 'धुआँ धुआँ ज़िन्दगी' में प्रस्तुत सभी 12 कहानियाँ सामाजिक समस्याओं के प्रति पाठकों को जागरूक कर समाधान देती दिखती हैं। सभी   कहानियाँ रोचक,सरल,सरस,संदेशपरक हैं और    पाठक हर कहानी को डूब कर पढ़ेगा ऐसी सभी समीक्षकों ने आशा व्यक्त की। सिसोदिया कथानक को  रोचकता और जिज्ञासा से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। मुख्य अतिथि राजेंद्र निगम 'राज' ,विशिष्ट अतिथि इन्दु 'राज' निगम  और मीनू त्रिपाठी  और अध्यक्ष डाक्टर रामनिवास इंडिया  ने दोनों रचनाकारों को पुस्तक विमोचन की बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए अपनी समीक्षा में इन सभी पुस्तकों को कालजयी बताया और दोनों रचनाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की। मंचासीन प्रतिभागियों में तरुणा पुण्डीर तरुनिल,शिप्रा झा,सरिता गुप्ता,शारदा मिश्रा,मनीष माना,चन्नी वालिया परिणीता सिन्हा और चंद्रमणी मणिका जी ने भी अपनी बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।


पुस्तक विमोचन के भव्य आयोजन के पश्चात प्रणेता साहित्य संस्थान की पूर्व आयोजित दो आनलाइन काव्य गोष्ठी के प्रतिभागियों को सम्मान पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया।