आयोडीन,लोहा,फोलिक एसिड, विटामिन ए और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों4 की कमी "छिपी हुई भूख" का कारण बनती है

आयोडीन,लोहा,फोलिक एसिड, विटामिन ए और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों4 की कमी  "छिपी हुई भूख" का कारण बनती है। हालांकि यह समस्या दुनिया भर में पायी जाती है लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में उसकी गंभीरता अधिक है। आज अधिकांश देशों में आयोडीन की कमी का खतरा है क्योंकि यह खनिज मिट्टी और पर्यावरण में असमान रूप से वितरित किया जाता है। कई क्षेत्रों में, मिट्टी में से आयोडीन की मात्रा तेजी से कम हो रही है और फलस्वरूप उस मिटटी से उगने वाले खाने में भी आयोडीन की कमी होती है। 



नयी दिल्ली - हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। हमारे रोज़ाना खाने में सबसे आवश्यकसूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक है आयोडीन। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए पोषक तत्त्व बहुत ज़रूरी होते हैं। शिशु और बढ़ती उम्र के बच्चों के हर दिन के खाने में पोषण, खास कर आयोडीन की कमी आज दुनिया भर में एक गंभीर समस्या बन चुकी है। बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए यह पोषक तत्त्व आवश्यक होते हैं। शुरूआती आयु में शरीर को मिलने वाला पोषण पूरे जीवन भर के लिए मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है।


5 वर्ष की आयु तक के बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए वांछित मात्रा में आयोडीन का सेवन महत्वपूर्ण है1। इस आयु में बच्चें बहुत ज्यादा जिज्ञासु होते हैं, सवाल पूछते रहते हैं और नयी-नयी चीजें करने के लिए उत्सुक रहते हैं। माता-पिता के लिए बच्चों की जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना और उनके सवालों का सही तरीके से जवाब देना महत्वपूर्ण होता है, साथ ही बच्चे को रोज़ाना खाने से पर्याप्त मात्रा में आयोडीन मिलता रहे इसके बारे में सतर्क रहना भी ज़रूरी है। यूनिसेफ की रिपोर्ट2 में कहा गया है कि जीवन के पहले 1,000 दिनों में, या गर्भाधान से लेकर दो वर्ष तक की आयु तक के समय में स्वास्थ्य, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास की नींव रखी जाती है।


आयोडीन की कमी के परिणामों से बचने के लिए आहार में आयोडीन को शामिल करने की आसान टिप्स बताते हुए टाटा न्यूट्रीकॉर्नर की न्यूट्रिशन एक्सपर्ट सुश्री कविता देवगण ने कहा, "समुद्री मछलियों, अंडों और डेयरी उत्पादों में आयोडीन होता है। लेकिन रोज़ाना खाने में इस्तेमाल किया जाने वाला आयोडीन युक्त नमक हमारे शरीर को हर दिन और सही मात्रा में आयोडीन दिलाने के लिए सही है और उसका सेवन सभी लोग कर सकते हैं।  हर दिन पर्याप्त मात्रा में आयोडीन के सेवन से बच्चों के मानसिक विकास में मदद करता है और उन्हें तेज बनाए रखता है।  अगर कोई बच्चें सभी प्रकार का खाना नहीं खाते हैं या उन्हें किसी खाने की एलर्जी है, फिर भी आयोडीन युक्त नमक से उनके रोज़ाना खाने में आयोडीन को आसानी से शामिल किया जा सकता है।"


किसी भी देश की भौगोलिक विशेषताएं यह निर्धारित करती हैं कि उनकी खाद्य श्रृंखला में आयोडीन की मात्रा कितनी है। आयोडीन की कमी की समस्याओं को दूर करने और देश की पूरी आबादी को आयोडीन की कमी से बचाने के लिए रोजाना रसोई में इस्तेमाल किए जाने वाले नमक को आयोडाइज़ करने की, अर्थात नमक में आयोडीन मिलाने की (यूनिवर्सल सॉल्ट आयोडाइज़ेशन) आसान योजना पर भारत में अमल किया गया।    


हर एक बच्चें को रोज़ाना आहार से पर्याप्त मात्रा में आयोडीन मिल रहा है या नहीं इस बात पर ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। माता-पिता को अपने बच्चे के खाने में आयोडीन की मात्रा कितनी होती है इसके बारे में डॉक्टर्स और बाल रोग विशेषज्ञ के साथ चर्चा करनी चाहिए। इससे बच्चों को आयोडीन की कमी के कारण होने वाली समस्याओं से दूर रखा जा सकता है।