हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा ‘प्राथमिक सदस्यों का सम्मान समारोह

० संवाददाता द्वारा ० 

नयी दिल्ली - हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा रोहिणी स्थित अकादमी के सभाकक्ष में वर्ष 2022 के लिए चयनित नए प्राथमिक सदस्यों का सम्मान समारोह, काव्य पाठ एवं पुस्तक लोकार्पण का आयोजन संपन्न हुआ । दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम काविधिवत शुभारम्भ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी तथा अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओम निश्चल की गरिमामयी उपस्थिति थी ।
हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि अकादमी के उद्देश्यों, योजनाओं एवं गतिविधियों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं वृहत रूप में विस्तार करने के उद्देश्य से अकादमी ने अपनी एक महत्त्वकांक्षी योजना ‘नि:शुल्क सदस्यता अभियान’ चलाया था जिसके तहत अकादमी को देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थी । प्राप्त प्रविष्टियों में से कुल 151 लोगों को वर्ष 2022 के लिए प्राथमिक सदस्यों के रूप में अकादमी से जोड़ा गया । प्राथमिक सदस्यों में ऐसे लोगों को सम्मिलित किया गया है जो लम्बे समय से शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा से जुड़े हुए हैं । हम आशा करते हैं कि आगामी योजनाओं एवं कार्यों में इन सदस्यों के दीर्घ अनुभव और ज्ञान से अकादमी लाभान्वित होगा ।
 उन्होंने आगे कहा कि हम कई वर्षों से बच्चों एवं भारतीय भाषाओं के शिक्षकों के लिए विभिन्न कार्यशालाएँ एवं सम्मान समारोह आयोजित करते आ रहे हैं और इसका विद्यालयों, अभिभावकों एवं छात्रों में गुणात्मक एवं सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा हैं । इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए हमने इस वर्ष दिल्ली प्रदेश के शिक्षकों के लिए भाषा पर केंद्रित राज्यस्तरीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजना किया जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार राशि, स्मृति चिह्न तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता सम्मान पत्र दिए गए और प्रथम आने वाले प्रतिभागी के विद्यालय को ‘चल वैजयन्ती’ दी गई । इस वर्ष यह चल वैजयंती माता जय कौर पब्लिक स्कूल, शालीमार बाग, दिल्ली को दी गई । यह वार्षिक आयोजन प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाएगा । इसी स्वरूप में अब बैंकों के कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए भी भाषा पर केंद्रित भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसे महत्त्वपूर्ण आयोजनों को योजनाबद्ध किया जा रहा है । 
इस अवसर पर अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘हिन्दुस्तानी भाषा भारती’ के हरियाणवी विशेषांक के साथ संवेदनशील लेखिका सुश्री यति शर्मा की दो पुस्तकों का भी लोकार्पण भी किया गया । मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी  एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओम निश्चल  के हाथों से नए सदस्यों को परिचय पत्र, अंग वस्त्र एवं पुस्तक भेंट करके सम्मानित किया गया । अपने उद्बोधन में बोलते हुए डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि एक अच्छा लेखक वो नहीं होता जो अपने अनुभवों को ज्यों का त्यों लिखे । एक अच्छा लेखक वो होता है जो अनुभवों को पहले माँझे और अपने विचारों को मथकर नए निचोड़ निकालते हुए लिखे । वर्तमान परिस्थिति को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल कोई भी किसी के लिए भी कुछ भी टीका-टिपण्णी कर रहा है । 

हमें जब तक सम्बंधित विषय का ज्ञान न हो तो ऐसे विषयों पर कुछ भी लिखने से बचना चाहिए, खासकर प्रतिकूल टिपण्णी करने से तो बचना ही चाहिए । श्रेष्ठतम साहित्य भी तभी लिखा जा सकता है जब हम अनुशासन का पालन करते हुए लिखें । सुश्री यति शर्मा की लेखन शैली और व्यापक अनुभव की प्रशंसा करते हुए डॉ. जोशी ने उन्हें नई पुस्तकों के लिए बधाई दी तथा साहित्यिक जीवन में यश और सम्मान की शुभकामना व्यक्त की । युवाओं के बीच भाषा के बिगड़ते स्वरूप को लेकर भी उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की । आजकल जिस तरह से हिन्दी लिखी जा रही है, उनमें कई तरह की वर्तनी दोष देखने को मिलते हैं । कुछ लोग पूर्णविराम की जगह अंग्रेजी फुलस्टॉप लिखकर काम चला रहे हैं तो कहीं माँ के लिए मां या तो मा लिखा जा रहा है । आजकल लोगों में ऐसा प्रचलन बढ़ रहा है कि सामने वाले को बस समझ आना चाहिए कि हम क्या कहना चाहते हैं; व्याकरण और भाषा अनुशासन से कोई नाता नहीं रहा । यह प्रवृत्ति भाषा के लिए हानिकारक है । एक अल्पविराम इधर से उधर हो जाए तो पूरे वाक्य का अर्थ बदल जाता है । इसलिए हमें भाषा के इन छोटे-छोटे पहलुओं पर भी विचार करना होगा ।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. ओम निश्चल  ने हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के कार्यों को सराहते हुए कहा कि मैं पिछले कई वर्षों से अकादमी की गतिविधियों को देखता आ रहा हूँ, जो वास्तव में प्रशंसनीय है । जब कोई व्यक्ति संकल्प ले ले और वो ठान ले तो क्या नहीं हो सकता ? किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने के लिए पहले पहल की जानी चाहिए फिर उसके पीछे गतिशील बने रहना पड़ता है । सुश्री यति शर्मा को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि लेखक एक संवेदनशील व्यक्ति होता है जो समाज को प्रतिबिम्बित करता है ।  भाषा के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यानुभवों को भी उन्होंने श्रोताओं के साथ साझा किया ।  इस अवसर पर साहित्यकार एवं लेखिका सुश्री यति शर्मा, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के पूर्व अधिकारी एवं संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान आदरणीय आचार्य विद्या प्रसाद मिश्र एवं पुस्तक के प्रकाशक डॉ. सत्यवीर सिंह ने भी अपने-अपने  विचार रखे ।
 
अकादमी की राष्ट्रीय  कार्यकारिणी एवं संपादक मंडल  की सदस्या सुषमा भण्डारी की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य-पाठ का शुभारंभ हुआ । उपस्थित कई सदस्यों ने अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचनाओं सीमा सिंह, इंदुमती मिश्रा एवं डॉ. पूजा कौशिक, डॉ. वनीता शर्मा सहित लगभग 20 सदस्यों ने काव्य-पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध किया । काव्य सत्र का संचालन सरोज शर्मा ने और प्रथम सत्र का संचालन  सुरेखा शर्मा ने किया। डॉ. जोशी एवं डॉ. ओम निश्चल ने अपनी भावपूर्ण कविताओं एवं गीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया। विजय शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन से समारोह समाप्त हुआ।

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