लाइफ़सेल की कम्युनिटी कॉर्ड ब्लड बैंकिंग की पहल ने भारत में कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट को आसान बनाया

० योगेश भट्ट ० 

नई दिल्ली : लाइफ़सेल की कम्युनिटी कॉर्ड ब्लड बैंकिंग की पहल ने भारत में कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट को सस्ता और अधिक सुलभ बनाने दिया है, जिसकी बदौलत राष्ट्र ने आज 9 साल की एक बच्ची के अप्लास्टिक एनीमिया से बचने का अपनी तरह का पहला उत्सव मनाया। एक कार्यक्रम में, मिस बतुल हुज़ेफ़ा बोहारी, जो ड्यूल यूनिट कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट प्रक्रिया से गुज़री, ने लाइफ़सेल इंटरनेशनल के डॉक्टरों और प्रबंधन की उपस्थिति में हैदराबाद से मिस दिव्शा अग्रवाल 4 साल और दिल्ली से मास्टर अद्विक अग्रवाल 5 साल के डोनर परिवारों से मुलाकात की और बातचीत की।
15 अक्टूबर 2020 को, महाराष्ट्र के नासिक में लोटस इंस्टीट्यूट ऑफ हेमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के डॉ. प्रीतेश जूनागड़े के नेतृत्व में वरिष्ठ डॉक्टरों की एक टीम ने अहमदनगर, महाराष्ट्र की मिस बतुल को बचाने के लिए यह अनोखा ड्यूल कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट किया। यह ट्रांसप्लांट विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था क्योंकि कोई उपयुक्त बोन मैरो डोनर नहीं थे और सार्वजनिक कॉर्ड ब्लड बैंकों से मैचिंग यूनिट को प्राप्त करने की लागत काफ़ी अधिक होती। लाइफ़सेल कम्युनिटी बैंक के सदस्यों के रूप में, माता-पिता ने दो कॉर्ड ब्लड यूनिट के लिए एक मैचिंग अनुरोध रखा, जब बतुल के सगे भाई का एचएलए मैच केवल 50% (4/8) पाया गया। लाइफ़सेल रजिस्ट्री में दो उच्च गुणवत्ता वाले मैच पाए गए, जिन्होंने अम्बिलिकल कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट की आवश्यकता को पूरा किया। सबसे महत्वपूर्ण बात, माता-पिता इन मैचिंग यूनिट को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के ले पाए, जिसकी कीमत भारत में यूसीबी ट्रांसप्लांट की लागत का विश्लेषण करने वाले 2011 के एक अध्ययन के अनुसार ₹45,00,000/यूनिट से कम नहीं होती।
डोनर्स को धन्यवाद देते हुए, मिस बतुल बोहारी के पिता, मिस्टर हुज़ेफ़ा बोहारी ने कहा, “हम अपनी बच्ची को उसकी सामान्य दिनचर्या में वापस देखकर, हमेशा की तरह खुश देखकर बहुत खुश हैं। उसे उन गतिविधियों में लगा देखकर खुशी होती है जो उसे बहुत पसंद हैं, चाहे वह पेंटिंग हो या ड्राइंग। हम अपनी बेटी को एक नया जीवन जीने का अवसर प्रदान करने के लिए डोनर्स, डॉ. प्रीतेश जूनागड़े और लाइफ़सेल के हमेशा आभारी हैं। हमारे दूसरे बच्चे के कॉर्ड ब्लड को अब उनकी कम्यूनिटी कॉर्ड ब्लड बैंकिंग पहल के माध्यम से संरक्षित किया गया है, और यदि स्थिति उत्पन्न होती है, तो हम निश्चित रूप से आगे आएँगे और ज़रूरतमंदों को अपनी तरफ़ से पूरा साथ देंगे।”

लाइफ़सेल इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक, मिस्टर मयूर अभया ने कहा, “हमारा कम्यूनिटी कॉर्ड ब्लड बैंकिंग समाज में जो सार्थक प्रभाव पैदा कर रहा है, उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। इन तीनों बच्चों को एक साथ खेलते हुए देखना बहुत अच्छा था, और मैं इसे संभव बनाने के लिए डोनर परिवारों और डॉक्टरों को धन्यवाद देता हूँ। हम देश में लोगों के लिए कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट को अधिक से अधिक किफ़ायती और शीघ्रता से सुलभ बनाने, और इस प्रकार स्वस्थ भविष्य के लिए सुरक्षा कवच को मज़बूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

लोटस अस्पताल के निदेशक डॉ. प्रीतेश जूनागड़े ने कहा, “ट्रांसप्लांट द्वारा इलाज योग्य अधिकांश रक्त संबंधी विकारों में, रोगियों के स्वयं के स्टेम सेल उपयुक्त नहीं होते हैं। इसलिए, सबसे अच्छा डोनर परिवार का एक करीबी सदस्य होता है, आमतौर पर सगे भाई-बहन। हालाँकि, इस विशेष मामले में, भाई-बहन के साथ केवल 50% मैच था और इसलिए एक सफल ट्रांसप्लांट के लिए एक असंबंधित डोनर से उच्च गुणवत्ता वाला मैच मिलना महत्वपूर्ण था। सौभाग्य से, चूँकि परिवार लाइफ़सेल के कम्यूनिटी बैंकिंग प्रोग्राम का हिस्सा था, इसलिए वे विशाल इन्वेंट्री तक जल्दी, मुफ़्त एक्सेस प्राप्त कर सके।

लाइफसेल्स कम्युनिटी कॉर्ड ब्लड बैंकिंग नामक यह नया प्रोग्राम 2017 में शुरू किया गया था, जो कम्युनिटी के सदस्यों को एक साझा पूल से संरक्षित अम्बिलिकल कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल्स को साझा करने में सक्षम बनाता है। इस प्रकार, कम्युनिटी बैंकिंग, स्टेम सेल द्वारा इलाज योग्य 80 से ज़्यादा रक्त विकारों से बच्चे, भाई-बहनों, माता-पिता और दादा-दादी को पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

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