बिल्डिंग मटेरियल क्षेत्र में लीडर अल्यूडेकोर और नेडजिंक ने मिलाए हाथ


० योगेश भट्ट ० 

नई दिल्ली, भारत में मेटल कम्पोजिट पैनल्स के प्रमुख निर्माता अल्यूडेकोर और दुनियाभर में जिंक सामग्री के अग्रणी निर्माता नेडजिंक ने बिल्डिंग मटेरियल के टिकाऊ समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। बिल्डिंग मटेरियल क्षेत्र के दोनों दिग्गज इस करार के माध्यम से भारतीय निर्माण उद्योग में पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ समाधानों को पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

नेडजिंक की अल्यूडेकोर के साथ भागीदारी भारत के बिल्डिंग मटेरियल सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि है। नेडजिंक 130 साल से यूरोप और दुनियाभर के अन्य देशों में इमारतें बनाने के लिए जिंक उपलब्ध करा रहा है। भारत में इस धातु का उपयोग इसकी क्षमता से कम ही हुआ है। अब भारत इस टिकाऊ धातु के तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। अल्यूडेकोर भी पिछले 20 साल से अनूठे उत्पाद बना रहा है, जिससे वह इनोवेटिव टिकाऊ समाधानों को अपनाने के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों दिग्गजों ने साथ आकर भारत में जिंक प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसमें नेडजिंक की प्रसिद्ध और विश्वस्तरीय जिंक निर्माण क्षमताओं का लाभ उठाया जाएगा।

अल्यूडेकोर के सीएमडी अशोक कुमार भैया ने कहा “यह हमारे देश के लिए एक महान क्षण है, जब हमारे देश में ग्रीन, टिकाऊ और रिसाइकल योग्य प्रोडक्ट को लाने के लिए अपने क्षेत्र के दो बड़े दिग्गजों ने हाथ मिलाया है। जिंक ज्यादा टिकाऊ धातु है, 100% तक रिसाइकल हो जाती है, ज्यादा चलती है, मेंटेनेंस भी नहीं है, ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन बेहद कम है, सेल्फ-हीलिंग है और खनन से उत्पादन की प्रक्रिया में अन्य धातुओं के मुकाबले काफी कम ऊर्जा की खपत होती है। निश्चित तौर पर हमारे समाज के लिए जिंक बहुत अधिक फायदेमंद है।” अशोक कुमार भैया ने यह भी कहा कि “हम रोल्ड टाइटेनियम जिंक को फैकेड क्लैडिंग, छत बनाने की सामग्री में और अन्य इनोवेटिव इस्तेमालों के लिए उपलब्ध कराएंगे। ”भारत को यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (यूएसजीबीसी) की सालाना लिस्ट में 2021 में 2.8 मिलियन सकल क्षेत्रफल वर्ग मीटर (जीएसएम) के साथ दुनियाभर में एलईईडी प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग्स के मामले में तीसरे स्थान पर रखा गया है। यह प्रोडक्ट भारत में ग्रीन प्रमाणित इमारतों के बढ़ते दायरे को महत्व प्रदान करेगा।

आज की बात करें तो भारत में मेटल फैकेड्स का कुल बाजार लगभग 4000 करोड़ रुपये का है। अगले दो वर्षों में यह बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। इसमें जिंक मेटल फैकेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है, जिसके अगले 2-3 वर्षों में बढ़कर 5% होने की उम्मीद है। इस प्रकार यह 250 करोड़ का बाजार बन जाएगा। अल्यूडेकोर-नेडजिंक की साझेदारी अगले दो-तीन वर्षों में इस बाजार में 100 करोड़ रुपये के कारोबार को टारगेट कर रही है। नेडजिंक के ग्रुप बिजनेस डायरेक्टर इरविन स्मीट्स कहते हैं, “भारत हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण बाजार है। हम यहां अपने प्रोडक्ट्स को लोकप्रिय बनाने के लिए अल्यूडेकोर के साथ मिलकर आक्रामक रूप से काम करने जा रहे हैं। नेडजिंक की एडवांस टेक्नोलॉजी और हाई-क्वालिटी जिंक शीट बनाने में हमारी विशेषज्ञता के साथ हम भारतीय उपभोक्ताओं को ऐसे प्रोडक्ट देने जा रहे हैं, जो लंबे समय तक चलेंगे और टिकाऊ है।”

अल्यूडेकोर की कुल स्थापित क्षमता (सभी धातुओं का फाइनल प्रोडक्शन) वर्तमान में पांच मिलियन वर्ग मीटर है। आने वाले महीनों में सप्लाई चेन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कोटेड कॉइल क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा। अल्यूडेकोर एक और कारखाना खोल रहा है, जिससे वह अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं का आक्रामक रूप से विस्तार देगा। यह फैक्ट्री हरिद्वार में वर्ष के अंत तक चालू हो जाएगी।

“ग्रीन बिल्डिंग के रूप में पहचान प्राप्त करने के कुछ मानदंड हैं, जैसे कि टिकाऊ सामग्री और टिकाऊ निर्माण प्रथाओं का उपयोग। एक ग्रीन बिल्डिंग एक ऐसी इमारत है, जिसे प्राकृतिक और टिकाऊ सामग्री से बनाया जाता है। साथ ही ऐसी प्रक्रिया का उपयोग होता है, जिससे आसपास के पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट इंडस्ट्रियल काउंसिल के डायरेक्टर जनरल डॉ. पीआर स्वरूप कहते हैं, 'ग्राहकों को पूरी संतुष्टि देने के लिए कुशल इंस्टॉलरों का होना भी जरूरी है।

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