पूरा विश्व आज संस्कृत की ओर देख रहा है

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली -पूर्व केन्द्रीय मंत्री ' निशंक ' ने  कहा कि भारतीय संस्कृति के अमूल्य धरोहर को इन्डोनेशिया जैसे मुस्लिम बाहुल्य देशों में भी देखा जा सकता है जहां पवनपुत्र हनुमान, पुरुषोत्तम राम, श्रीकृष्ण तथा विष्णु आदि की मूर्तियां सर्वत्र विराजमान हैं । भारतवासी वहां से भी रामलीला का मंचन सीख सकतें हैं । इन्डोनेशिया के लोग का मानना है कि इस देश में इस्लाम सत्ता तो है । लेकिन संस्कृति तो पुरुषोत्तम राम का ही है । उन्होंने यह भी कहा कि वहां पर उन्होंने घटोत्कच का के जीवंत मंचन देख कर आश्चर्यचकित रह गये थे।  डा वीरेन्द्र सिंह बत् र्वाल की रचना ' फागुणी ' तथा डा विशनदत्त जोशी की पुस्तक ' पूर्वराग संरक्षण- प्रकत्पन राग ' को विमोचन भी विमोचन किया गया । 'फागुणी ' पहाड़ के परिवेश,पलायन तथा गरीबी की मार्मिक प्रस्तुति करती है । डा जोशी की किताब पारंपरिक भारतीय रागों की विशेषता पर प्रकाश डालती है ।
 सीएसयू , दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में शिक्षक पर्व के 05-09 सितंबर 2022 के अन्तर्गत व्याख्यानों का आयोजन अभिमुख तथा आभासी दोनों माध्यमों से किया गया जिसमें देश के विविध प्रान्तों में अवस्थित इस विश्वविद्यालय के सभी परिसरों तथा आदर्श महाविद्यालयों के अधिकारियों ,संकाय सदस्यों तथा छात्र - छात्राओं ने भी भाग लिया इस भव्य समारोह में पूर्व उच्चतर शिक्षा मंत्री , सांसद डा रमेश पोखरियाल ' निशंक ' ने इस अवसर पर सभी को बधाई देते कहा कि पूरा विश्व आज संस्कृत की ओर देख रहा है और कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी के कंधों पर इसका उत्तरदायित्व है कि संस्कृत को अपने विश्वविद्यालय के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित करें ।
साथ ही साथ यह सौभाग्य की बात है कि इस विश्वविद्यालय को प्रो वरखेड़ी जैसे मणि के रुप में यशस्वी कुलपति मिला है ।डा 'निशंक' ने कहा कि नेप-2020 जितना पुरातन है उतना ही अद्यतन भी । इसमें एबीसी अर्थात एकेडमिक बैंक क्रेडिट के माध्यम से छात्र -छात्राओं के लिए अवसर खुलें हैं ।वे अपने क्रेडिट को लेकर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री पाठ्यक्रम में पढ़ सकते हैं । वस्तुत: यह नेप-2020 मानवीय मूल्यों के संबर्धन के लिए बनाया गया है । इसमें भारतीय भाषाओं को इसलिए महत्त्व दिया गया है कि मातृ भाषा में मूल भावना स्खलित नहीं होती है ।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ' निशंक ' ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति के अमूल्य धरोहर को इन्डोनेशिया जैसे मुस्लिम बाहुल्य देशों में भी देखा जा सकता है जहां पवनपुत्र हनुमान, पुरुषोत्तम राम, श्रीकृष्ण तथा विष्णु आदि की मूर्तियां सर्वत्र विराजमान हैं । भारतवासी वहां से भी रामलीला का मंचन सीख सकतें हैं । इन्डोनेशिया के लोग का मानना है कि इस देश में इस्लाम सत्ता तो है । लेकिन संस्कृति तो पुरुषोत्तम राम का ही है । उन्होंने यह भी कहा कि वहां पर उन्होंने घटोत्कच का के जीवंत मंचन देख कर आश्चर्यचकित रह गये थे। 
 डा वीरेन्द्र सिंह बत् र्वाल की रचना ' फागुणी ' तथा डा विशनदत्त जोशी की पुस्तक ' पूर्वराग संरक्षण- प्रकत्पन राग ' को विमोचन भी विमोचन किया गया । 'फागुणी ' पहाड़ के परिवेश,पलायन तथा गरीबी की मार्मिक प्रस्तुति करती है । डा जोशी की किताब पारंपरिक भारतीय रागों की विशेषता पर प्रकाश डालती है ।

' निशंक 'ने ग्रन्थों को लोकार्पित कर उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि शब्द की शक्ति अणु बम से भी अधिक शक्तिशाली होती है ।और कहा कि हिमालय सदियों से साधना का केन्द्र रहा है ।साथ ही साथ उन्होंने कोरोना काल के भारत को याद करते हुए यह भी कहा कि हमारे शिक्षकों इस वैश्विक संकट में भी पढ़ा कर विद्यार्थियों के सत्रों को पीछे नहीं होने दिया । वाकई में शिक्षक कुछ भी कर सकते हैं । कार्यक्रम के अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो वरखेड़ी ने पूर्व शिक्षा मंत् निशंक के केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली में प्रथम आगमन के लिए आभार व्यक्त करते हुए उनके शैक्षणिक योगदानों तथा ओजस्वी रचनाधर्मिता पर प्रकाश डालते यह यह बताया कि हम लोगों को इस बात से प्रेरणा लेनी चाहिए कि मंत्री ने सौ से अधिक उत्कृष्ट पुस्तकों को इतना व्यस्त रहते हुए भी कैसे लिखी है यह तथ्य शिक्षक समाज के लिए सर्वदा प्रेरणीय है । 

प्रो वरखेड़ी ने उनको नेप-2020 के प्रारुप निर्माणकर्ताओं में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी माना और कहा कि उनके जैसे लब्धप्रतिष्ठ कवि तथा राजनीति के इस विश्वविद्यालय में ' शिक्षक पर्व 'पर पधारने से सभी शिक्षकों , अधिकारियों तथा कर्मचारियों का आत्म सम्मान बढ़ा है । कुलपति ने यह भी कहा कि जब इस कार्यक्रम के लिए संमान्य मंत्री जी से बातें हुईं तो उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी ने मेरे शुरुआती लेखन को पढ़ कर मुझे सम्मानित किया था ।इस कारण से भी मैं इस 'शिक्षक पर्व ' तथा पुस्तक विमोचन में आने से अपने आप को रोक नहीं सका हूं।इस कार्यक्रम में प्रो वनमाली विश्वास ने अतिथियों का स्वागत तथा प्रो आर .जी.मुरली ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।डा मधुकेश्वर भट्ट ने मंच का संचालन करते हुए  निशंक की रचनाओं को बीच बीच में सस्वर पाठ कर सभागार में चार चांद लगा दिया ।

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