क़ब्रिस्तान में जगह भर जाने के कारण डाबड़ी क़ब्रिस्तान कमेटी द्वारा जनाजे दफनाने पर पाबंदी

० इरफ़ान राही ० 
नई दिल्ली- पश्चिमी दिल्ली के डाबड़ी सीतापुरी स्थित कब्रिस्तान वेलफेयर एसोसिएशन,डाबड़ी कमेटी ने मजबूरन एक सख्त फैसला लेते हुए डाबड़ी कब्रिस्तान के बाहर एक नोटिस चस्पां किया गया है जिसमे लिखी है "एक दर्दमंदाना गुज़ारिश" आप सभी क्षेत्र के मुसलमानों को बड़े ही दुख के साथ सूचित किया जाता है कि आपके छोटे से डाबड़ी क़ब्रिस्तान में खाली जगह ना होने की वजह से क़ब्रिस्तान में बालिग़ लोगों को दफ़नाना कुछ समय के लिए बंद किया गया है ताकि नई क़ब्रों की खुदाई के दौरान निचली सतह की पुरानी क़ब्र में दफ़न मय्यतों को नुक़सान ना पहुंचे और ना ही मय्यतों की बेहुरमती हो।"

क़ब्रिस्तान कमेटी के नायब सदर अहमद अली अंसारी ने बताया कि पिछले दिनों जब हमारे बगल के बड़े क़ब्रिस्तान की लगभग 20 वर्षों से देख-रेख करने वाले केयरटेकर जनाब निसार पुत्र इम्तियाज़ अहमद की मौत हुई तो उन्हें भी उस कब्रिस्तान में नहीं दफनाने दिया गया जिबकी वह लगभग 20 वर्षों से क़ब्रिस्तान की सेवा कर रहे थे यह सब डाबड़ी के बड़े कब्रिस्तान की फर्जी कमेटी और कुछ दबंग लोगों ने किया। उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से निसार साहब की मैय्यत को हमें छोटे क़ब्रिस्तान में तीन जगह कब्र खोदने की कोशिश की गई खुदाई के दौरान पहले से दफन मैय्यत निकलने के कारण खुदाई नाकाम रही फिर से चौथी जगह दीवार के किनारे कब्र खोदी गई और बमुश्किल उनकी मैयत को दफनाया गया।

इसीलिए हमारी क़ब्रिस्तान कमेटी के सभी मेम्बरान ने यह फ़ैसला लिया है कि 11 सितंबर 2022 से डाबड़ी कब्रिस्तान में सिर्फ 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मैय्यत को ही दफनाने की इजाज़त होगी।
उल्लेखनीय है कि दादा देव अस्पताल के पास एम टी एन एल बिल्डिंग के पीछे दो क़ब्रिस्तान है एक बहुत छोटा है जिसकी यह कब्रिस्तान वेलफेयर एसोसिएशन, डाबड़ी कमेटी बनी है लेकिन एक बड़ा क़ब्रिस्तान जो कि दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड द्वारा चिन्हित है और कमेटी को वक़्फ़ बोर्ड से दोनों क़ब्रिस्तानों की एन ओ सी भी मिली हुई है बावजूद इसके वहाँ आवाम को अपनी मैय्यतें नहीं दफ़नाने दी जाती डाबड़ी क़ब्रिस्तान कमेटी का आरोप है कि इस क़ब्रिस्तान में डाबड़ी गांव के चंद गिने-चुने लोग यहाँ क्षेत्र के ही मुसलमानों को अपनी मैय्यातें दफनाने नहीं देते।

दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट रईस अहमद जो इस कब्रिस्तान की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं उन्होंने कहा कि वक़्फ कानून के मुताबिक कब्रिस्तान अहले इस्लाम होता है जिसमें किसी भी इलाके के शख़्स को दफ़न करने से रोका नहीं जा सकता जबकि बड़े कब्रिस्तान में दफन करने में कुछ असामाजिक तत्व रुकावट डालते हैं जिसकी वजह से आस-पास की लाखों की मुस्लिम आबादी को बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा कि हमारी सरकार व प्रशासन से यह माँग है कि वह इस पर एक्शन ले और ये जो लगभग 4,500 वर्ग मीटर का बड़ा कब्रिस्तान है इसको आवाम के लिए खोला जाए ताकि इसके आस-पास के क्षेत्र के मुसलमानों को इस बड़े कब्रिस्तान में 2 गज की जमीन दफन के लिए सुकून मयस्सर हो।

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