आजादी के पहले भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम काल रहा है

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली । 'अमृतकाल के संकल्प और मीडिया' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हरिवंश ने कहा कि जो चीजें पहले सौ वर्षों में बदलती थीं, आज उसके लिए दो दिन का समय भी नहीं लगता। आज आप मामूली संसाधनों के साथ मीडिया स्टार्टअप की शुरुआत कर सकते हैं और समाज में बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष से कठिन सृजन होता है। यह कठिन तप और साधना है। युवाओं के तप से ही भारत का भविष्य तय होगा। आजादी के सौवें वर्ष में भारत की क्या तस्वीर होगी, वो युवाओं के सपनों और संकल्पों से तय होगा।
पत्रकारिता का दौर अब पूरी तरह बदल गया है। आपको चुनौतियों में से रास्ता निकालना है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि चुनौतियों के बीच आज युवाओं के पास अनंत अवसर हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव का सबसे बड़ा अध्याय इंसान लिख सकता है। आज प्रिंट, रेडियो और टीवी के अलावा डिजिटल मीडिया, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, ऑडियो, पॉडकास्ट, मल्टीमीडिया, डाटा साइंस और मीडिया शिक्षण जैसे अनेकों विकल्प मौजूद हैं।

भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के शैक्षणिक सत्र 2022-23 का शुभारंभ करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि आजादी के पहले भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम काल रहा है। उस समय के पत्रकार 'इन्वेस्टिगेटर' के साथ-साथ 'इन्वेस्टर' भी थे। सीमित संसाधनों के साथ उन्होंने पत्रकारिता के स्वर्णिम काल का निर्माण किया। आज के टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आसानी से हम बहुत कुछ कर सकते हैं और पत्रकारिता एक नया स्वर्णिम काल गढ़ सकते हैं। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना आयुक्त श्री उदय माहुरकर, आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, कार्यक्रम के संयोजक एवं उर्दू पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

  हरिवंश ने कहा कि सोशल मीडिया से आज पत्रकारिता के सामने साख का संकट खड़ा हो गया है। फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोजाना लाखों फेक न्यूज परोसी जा रही हैं। हम सभी को मिलकर इनका सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता के बिना आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन उसका कोई असर समाज पर नहीं होगा। तकनीक हमारे लिए वरदान के साथ सबक भी है। ये हम पर निर्भर करता है कि इसका कैसा उपयोग किया जाए। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि देश में डिजिटल क्रांति से विकास की नई तस्वीर निकलकर सामने आई है। आज प्रत्येक व्यक्ति के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। ये भारत के पुनर्जागरण का काल है। उन्होंने कहा कि हम जहां एकतरफ 'नेशन फर्स्ट' की डिप्लोमेसी कर रहे हैं, वहीं भारत की 'साॅफ्ट पावर' ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया है। श्री माहुरकर के अनुसार टीआरपी बेस्ड जर्नलिज्म मीडिया और समाज दोनों के लिए बहुत नुकसानदायक है।

 आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि आप सभी के लिए ये साधना और समर्पण का साल है। उन्होंने कहा कि हम वही बनते हैं, जो हम सोचते हैं। पिछले 75 वर्षों में हमने शानदार यात्रा की है। आने वाले 25 वर्षों में हमें विश्व मंच पर भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है। प्रो. द्विवेदी के अनुसार इस विश्व में हिन्दुस्तानी अकेले हैं, जो हर स्थिति में समन्वय बैठा लेते हैं। दुनिया मानती है कि किसी भी तरह के संकटों का सामना करने में हिन्दुस्तानी सक्षम हैं। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में 'अमृतकाल : पंच प्रण और मीडिया' विषय पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे.के. बजाज, पेसिफिक विश्वविद्यालय के योजना एवं नियंत्रण के ग्रुप प्रेसिडेंट प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर स्टडीज के डीन प्रो. मजहर आसिफ एवं 'ऑर्गनाइजर' के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

शुभारंभ समारोह के अंतिम सत्र में 'मीडिया उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य' विषय पर 'न्यूज 24' की प्रधान संपादक अनुराधा प्रसाद, बिजनेस वर्ल्ड के अध्यक्ष एवं प्रधान संपादक डॉ. अनुराग बत्रा, NEWJ के संस्थापक, सीईओ एवं प्रधान संपादक शलभ उपाध्याय एवं डीबीजी टेक्नोलॉजी (भारत) के कार्यकारी निदेशक डॉ. अभिषेक गर्ग ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रो. अनुभूति यादव द्वारा संपादित पुस्तक 'न्यू मीडिया जर्नलिज्म' एवं प्रो. प्रमोद कुमार द्वारा लिखित पुस्तक 'मीडियाकर्म : योग्यता और यथार्थ' का भी विमोचन किया गया।

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