India Gate राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी और ललित कला अकादमी करेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

० संवाददाता द्वारा ० 
 ललित कला अकादमी द्वारा चित्रकारी कार्यक्रमों का आयोजन 4 बजे से होगा। संगीत नाटक अकादमी द्वारा बैंड परफॉर्मेंस का आयोजन संध्या 6 बजे से होगा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा ‘साइबर सुरक्षा’ विषय पर नुक्कड़ नाटक

नयी दिल्ली - राष्ट्रीय राजधानी स्थित कर्तव्‍य पथ और इंडिया गेट लॉन पर 12 और 13 नवंबर, 2022 को विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी में, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा नुक्कड़ नाटक, संगीत नाटक अकादमी द्वारा बैंड परफॉर्मेंस और ललित कला अकादमी द्वारा चित्रकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यहाँ चित्रकारी कार्यक्रम संध्या 4 बजे से आयोजित होंगे, तो वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन संध्या 6 बजे से होगा।

आज जब देश अपनी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ के इसी कड़ी में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा साइबर सुरक्षा, रक्तदान, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई सामाजिक मुद्दों को लेकर निरंतर कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।  यह प्रस्तुति दिल्ली के स्थानीय रंगमंच ‘स्टेप्स फॉर चेंज’ द्वारा दी जाएगी, जिसमें दर्शकों को ऑनलाइन धोखा-धड़ी, सुरक्षा उपाय, कानूनी प्रावधानों जैसे कई विषयों को लेकर जागरूक किया जाएगा।

वहीं, संगीत नाटक अकादमी के अंतर्गत होने वाले बैंड परफॉर्मेंस में दो समूह अपनी प्रस्तुति देंगे। इसमें 12 नवंबर को पहली प्रस्तुति प्रसिद्ध बीन वादक  रामवीर नाथ जोगी अपने सहयोगियों के साथ देंगे। गौरतलब है कि बीन वादन, संगीत का एक ऐसा आयाम है जिसका इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आया है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे 'तुम्बी', 'नागासर', 'सपेरा बांसुरी', 'नागस्वरम' और 'महुदी' जैसे कई नामों से जाना जाता है और बीन बजाने वाले कलाकारों को ‘बीन जोगी’ की संज्ञा दी जाती है। तो वहीं, 13 नवंबर को दूसरी प्रस्तुति प्रसिद्ध मृदंग कलाकार पी. वेत्री भूपति अपने रुद्राक्षम समूह के सहयोगियों के साथ देंगे।

इसके अलावा, ललित कला अकादमी द्वारा होने वाले पोर्ट्रेट पेंटिंग कार्यक्रम में 10 कलाकार हिस्सा लेंगे, जो चित्रों को बनाने के लिए पेंसिल स्केचिंग, चारकोल स्केचिंग, वॉटर कलर जैसे कई साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले कलाकारों को अपनी कलाकृतियों पर ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ का लोगो इस्तेमाल करना होगा, ताकि इसे एक स्मृति चिन्ह के रूप में भी सहेजा जा सके।

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