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मार्च 12, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भोजपुरी फ़िल्म "हत्यारा" की शूटिंग 16 मार्च से मुम्बई में होगी शुरू

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मुम्बई । इंदु चंद्रा फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनने जा रही भोजपुरी फिल्म हत्यारा की शूटिंग 16 मार्च से मुम्बई में शुरू की जाएगी।फ़िल्म के चर्चे जोरों पर हैं और फ़िल्म का प्री-प्रोडक्शन प्लान हो चुका हैं।अब प्रोडक्शन का काम शुरू होने को हैं।फ़िल्म के गीतों की रिकॉर्डिंग हो चुकी हैं। जिसे संगीत से सजाया हैं म्यूजिक डायरेक्टर दामोदर राव,सूर्यकांत व चंदन ने। फ़िल्म के गीतों को भोजपुरी के लोकप्रिय गायकों ने अपनी आवाज दी हैं। इस फ़िल्म में आईटम गाने को आज की चर्चित गायिका अंतरा सिंह प्रियंका अपनी आवाज दी हैं।फ़िल्म के बाकी गीतों को हरिश्चन्द्र राजपूत,ब्रजेश पाठक व सूर्यकांत सिंह ने लिखा हैं। हत्यारा के निर्माता निर्देशक ब्रजेश पाठक ने फ़िल्म को लेकर कहा कि यह एक मल्टी स्टारर फ़िल्म हैं। जिसकी कहानी पूर्ण रूप से पारिवारिक मनोरंजक और संदेशात्मक हैं।जो अन्य भोजपुरी फिल्मों से बेहद अलग हैं। फ़िल्म में सूरज सम्राट,मनोज द्विवेदी,तृषा खान,मनोज टाइगर,अयाज़ खान,संजय वर्मा,श्रद्धा नवल,विशाल बुबना,संजीव सिंह ठाकुर व अन्य का अभिनय दर्शकों को देखने को मिलेगा।फ़िल्म के कला निर्देशक सीपी भट्ट,फाइट मास्टर प्रदीप खड़

".अर्ध नारी." में अपनी सशक्त भूमिका में नज़र आएंगे आर० एस० गिरी

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आर० एस० गिरी से हुई खास बातचीत में उन्होंने अपने बारे में कहा कि मुझे काफी खुशी हो रही है कि बहुत जल्द ही मुझे एक हिन्दी फ़िल्म में मुम्बई के नामचीन कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिलने जा रहा है। " किनकर फिल्म्स" के बैनर तले बनने जा रही एक हिन्दी फ़िल्म जिसका नाम है ".अर्ध नारी." जिसकी शूटिंग शीघ्र ही पटना, बिहटा, बिहारशरीफ, महानंदपुर एवं राजगीर के रमणीय स्थलों पर की जाएगी। इस फ़िल्म के गाने दार्जिलिंग, गोवा, मॉरिशस तथा श्रीलंका में फिल्माए जाएंगे.। इस फिल्म का मुहूर्त पटना से सटे बिहटा में 31 मार्च को होना तय हुआ है। इस फिल्म के निर्माता " किनकर फिल्म्स" हैं तथा निर्देशक सुनील चालक हैं। लेखक हैं पवन कुमार पेलू तथा प्रॉडक्शन हेड हैं विनोद गिरि । मेकअप का भार सम्हालने के लिए हैं मिठू यादव और चन्दन चाहत। यह फ़िल्म किन्नर समुदाय के लोगों के जीवन पर आधारित है । इस फिल्म में काम करने वाले कलाकार हैं जावेद हैदर, विनोद गिरि, ब्रजेश त्रिपाठी, एवं पटना के जाने माने वरिष्ठ चरित्र अभिनेता आर० एस० गिरि । 

हिंदू ग्रंथों में होली के त्योहार का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

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होली का खुमार सबके ऊपर चढ़ चुका है घर घर लोग जा कर के सुबह में होली खेले उसके बाद शाम में आपसी भाईचारा बनाते हुए दिखे । आपसी मतभेद मिटाते हुए । ऊंच-नीच का भेद मिटाते हुए एक दूसरे को गले लगाकर अबीर-गुलाल लगाऐ। हम बात कर रहे है बिहार क्षेत्र के  आज भी बड़े-बुजुर्गों का दिया हुआ रस्म घर घर जा कर के फगुआ गीत गया जाता है और आज भी इस रस्म को बखूबी निभाआ जाता है।   महादेव.........,आदि होली गीत गाय  सब झुम थे   सबके ऊपर चढ़ चुका है घर घर लोग जा कर के सुबह में होली खेले उसके बाद शाम में आपसी भाईचारा बनाते हुए । आपसी मतभेद मिटाते हुए । ऊंच-नीच का भेद मिटाते हुए एक दूसरे को गले लगाकर अबीर-गुलाल लगाऐ। हम बात कर रहे है   बहरौली आज भी बड़े-बुजुर्गों का दिया हुआ रस्म घर घर जा कर के फगुआ गीत गया जाता है और आज भी इस रस्म को बखूबी निभाआ जाता है। इसी  दुआर पर लोक परंपरा गीत बंगला  होली खेले महादेव.........,आदि होली गीत गा कर के सबके झुमाया जा रहा  बिहार मैं तमाम जगह होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है बच्चे बुजुर्ग आदि लोग  बट चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं गीत बाजा झुमका लोग होली महोत्सव का आनंद ले रहे हैं लो

हैंड्स-ऑन अनुभव और आत्मविश्वास की कमी से नहीं मिल पाते महिलाओं को टेक जॉब्स 

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मुंबई ,:उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इंजीनियरिंग प्रतिभा और विचारों को पोषित करने के उद्देश्य से काम करने वाली भारत की सबसे बड़ी आईपी-संचालित इनक्यूबेशन लैब्स में से एक ब्रिजलैब्ज सॉल्यूशंस एलएलपी ने हाल ही में नौकरी की तलाश के दौरान महिलाओं और पुरुषों के सामने आने वाली समस्याओं की तुलना करने के लिए सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण पूरे भारत में 2300+ प्रतिभागियों के बीच कराया गया। सभी प्रतिभागी 2019 में या उससे पहले इंजीनियर स्नातक बने थे। इनमें 58% पुरुष और 42% महिलाएं थीं। प्रतिभागी बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद और मुंबई के साथ-साथ दिल्ली, कोयम्बटूर, चेन्नई, कोलकाता, जयपुर और औरंगाबाद जैसे शहरों से थे। सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला कि कोडिंग का हैंड्स-ऑन अऩुभव न होने (40%) और कम आत्मविश्वास (33%) के कारण अधिकांश तकनीकी प्रतिभागियों को टेक नौकरियों को हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।  पुरुषों के लिए यह आंकड़े क्रमशः 38% और 31% है। प्रतिभागियों में, पुरुषों (31%) की तुलना में कम महिलाओं (27%) ने कहा कि उन्हें उभरते हुए तकनीकी प्लेटफार्मों और भाषाओं की अच्छी जानकारी नही

देश में पॉलीमर करेंसी नोट जारी करने की मांग

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पॉलिमर बैंकनोट्स को एक सिंथेटिक पॉलीमर से बनाया जाता है जिसको बाइक्सियाली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (बीओपीपी) कहते हैं और ऐसे नोटों में कई सुरक्षा विशेषताएं शामिल होती हैं, जो पेपर नोट में उपलब्ध नहीं हैं! पॉलीमर नोट में मेटामेरिक स्याही का उपयोग होता है । पॉलिमर नोट कागज़ी नोटों की तुलना में काफी लंबे समय तक रहते है जिससे पर्यावरणीय प्रभाव सुरक्षित रहता है ! आधुनिक पॉलीमर  बैंकनोट्स को सबसे पहले रिजर्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया  (आरबीए) और राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन (सीएसआईआरओ) और द यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न द्वारा विकसित किया गया था। उन्हें पहली बार 1988 के दौरान ऑस्ट्रेलिया में मुद्रा के रूप में जारी किया गया था। 1996 में ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से पॉलीमर नोटों में करेंसी के रूप में उपयोग किया जाने लगा है ! इसके साथ ही अन्य देश जो पूरी तरह से पॉलीमर नोट को करेंसी के रूप में उपयोग कर रहे हैं उनमें ब्रुनेई, कनाडा, मालदीव, मॉरीशस, निकारागुआ, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, रोमानिया, त्रिनिदाद, टोबैगो और वियतनाम जैसे देश में चलन में हैं।  नयी दिल्ली - कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्र

गाज़ियाबाद जर्नलिस्ट क्लब ने मनाया होली मिलन समारोह

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बनौधिया वैश्य समाज,दिल्ली का वार्षिकोत्सव

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गढ़वाली महिलाओं का होली नृत्य

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