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पुस्तक "पानी और आग एक अनूठा संगम" का विमोचन

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० आशा पटेल ०  जयपुर | विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर उप मुख्य मंत्री दीया कुमारी द्वारा विमोचन कार्यक्रम में डॉ मालती गुप्ता एवं डॉ रितिका अग्रवाल द्वारा लिखित और चित्रांकित द्विभाषी पुस्तिका "पानी और आग एक अनूठा संगम" का विमोचन किया गया। इसके साथ ही इसी विषय पर मूक बधिर दिव्यांग जन के लिए विशेष तौर पर बनाया गया वीडियो तथा दृष्टि बाधित दिव्यांग जन के लिए ब्रेल लिपि में लिखी गयी कविता का विमोचन भी उप मुख्मंत्री दीया कुमारी द्वारा किया गया| डॉ मालती गुप्ता पूर्व विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी, सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर ने बताया कि गौरतलब है कि विश्व में पहली बार बर्न्स विषय पर दिव्यांगजन के लिए विशेष तौर पर साइन लैंग्वेज में वीडियो एवं ब्रेल लिपि में कविता प्रिंट की गई है| डॉ मालती द्वारा किये गए इस प्रयास की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सराहना की। डॉ मालती गुप्ता ने दीया कुमारी को एक रिप्रजेंटेशन भी दिया जिसमें यह निवेदन किया गया है कि राजस्थान सरकार बर्न मुक्त राजस्थान अभियान आरम्भ करें | यदि ऐसा होता है तो हमारा प्रदेश यह अभियान आरम्भ करने वाला देश का प्रथम प्रदेश होग

पुस्तक ‘द बिग वर्ल्ड ऑफ स्मॉल टॉक’ का हुआ लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली। एम्पावरमेंट कोच अंजू दहिया ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अपनी पुस्तक ‘द बिग वर्ल्ड ऑफ स्मॉल टॉक’ का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डी. एस. राणा और लेखक हिमांशु राय मौजूद रहे। इसके साथ ही टस्कवार सिक्योरिटी, के संस्थापक कर्नल राजीव और कर्नल विजय भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पोक्लिओ ( आदित्यवीर) द्वारा एक संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुई, जो एबीआरएसम लंदन के चेलिस्ट और मेरिट धारक हैं। ‘द बिग वर्ल्ड ऑफ स्मॉल टॉक’ को प्रकाशन संस्था ड्रीम पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। इसके सीईओ, रोहित आर्य ने इस पुस्तक को प्रकाशित करने में उल्लेखनीय कार्य किया है। यह पुस्तक छोटे-मोटे वार्तालाप और गहन बातचीत के बीच की खाई को पाटती है, और इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे छोटे-मोटे वार्तालाप अर्थपूर्ण और गहन संवादों में विकसित हो सकते हैं। यह उन व्यक्तियों के लिए एक मूल्यवान संसाधन है जो बातचीत शुरू करने में संघर्ष करते हैं, उन्हें बनाए रखना चुनौतीपूर्ण पाते हैं, या अपनी संवाद कौशल को निखारना चाहते हैं। यह पुस्तक पेशेव

पुस्तक "स्मार्ट भिखमंगा" का लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  काठमांडू : नेपाल में हिमालयन लिटरेचर फेस्टिवल के तहत न्यूयॉर्क राइटर्स वर्कशॉप दौरान लेखक रवि शंकर की अध्यक्षता में भारत सरकार में कार्यरत अधिकारी एवं लेखक कृष्ण कुमार की तीसरी पुस्तक "स्मार्ट भिखमंगा" का विधिवत लोकार्पण हुआ। पत्रकार-लेखक प्रोफेसर एस.एस. डोगरा की छठी पुस्तक "उदाची वाम" जो रसियन भाषा में लिखी गई है, उसका पोस्टर भी लॉन्च किया गया।  इस सुअवसर पर रामकृष्ण आश्रम नेपाल के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी एकर्थानंदा, विशिष्ट अतिथि "हिमालिनी" पत्रिका के प्रबंध निदेशक डॉ. सच्चिदानंद मिश्र, नेपाल के पूर्व सांसद हरिचरण साह, इंग्लैंड की प्रमुख शिक्षाविद एवं लेखिका मारिया क्लेरी, त्रिभुवन विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. (प्रो.) विमुंस पौडेल, नेपाली युवा उद्यमी रवि कुमार सहित देश-विदेश से निमंत्रित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।

"गौ एवं गौवंश की संवैधानिक कानूनी स्थिति" का विमोचन

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली। गौ वंश देश की आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 'राष्ट्रीय गौधन महासंघ' के संयोजक विजय खुराना द्वारा संकलित एवं प्रकाशित पुस्तक "गौ एवं गौवंश की संवैधानिक कानूनी स्थिति" इस बारे में विस्तृत प्रकाश डालती है। इस पुस्तक का विमोचन एवं आत्म-निर्भर गौशालाओं पर चर्चा का आयोजन विश्व युवक केंद्र पर किया गया। इसका विमोचन विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार के कर कमलों द्वारा किया गया।  कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यपाल असम एवं पूर्व उप-राज्यपाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रो जगदीश मुखी थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस शम्भूनाथ श्रीवास्तव मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संतोष तनेजा ने की। राष्ट्रीय गौधन महासंघ द्वारा देश में गौधन को बढ़ावा देने के लिए गोबर से लकड़ी बनाने वाली मशीन पूर्व में मुफ्त में देने का निर्णय लिया था। राष्ट्रीय गौधन महासंघ के संयोजक विजय खुराना का कहना है कि गाय इस देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। महासंघ देश में 22 हजार गौशालाएं संचालित कर रहा है। हमार

निबंध संग्रह ' आदि - इत्यादि ' का हुआ लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली - साहित्यकार एवं समालोचक डॉ हरिसिंह पाल के निबंध संग्रह ' आदि इत्यादि ' का लोकार्पण नागरी लिपि परिषद के तत्वावधान में,गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा के सभागार में किया गया। इसका लोकार्पण पूर्व कुलपति डॉ प्रेमचंद पातंजलि, भाषाविद एवं फिजी के पूर्व हिंदी राजनयिक डॉ विमलेश कांति वर्मा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ चंद्रदेव यादव, प्राध्यापक डॉ राकेश दुबे, विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अतुल प्रभाकर और गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा की अध्यक्ष कुसुम शाह कर कमलों से किया गया।  संग्रह की जानकारी देते हुए निबंधकार डॉ पाल ने बताया कि इस 176 पृष्ठीय निबंध संग्रह में कुल 20 निबंधों को समाहित किया गया है। इनमें तीन निबंध नागरी लिपि, पांच हिंदी भाषा, पांच निबंध लोकसाहित्य और संस्कृति, दो योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण,दो महात्मा गांधी और एक एक निबंध अमीर खुसरो, मुस्लिम हिंदी लेखकों, डॉ भीमराव अम्बेडकर एवं दलित साहित्य पर केंद्रित है। निबंध संग्रह पर नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, डॉ कर्ण सिंह चौहान,डॉ वेदप्रकाश अमिताभ, डॉ राजेन्द्र मिलन,डॉ राजेन्द्र

तप्त धरा पर सावन की बूंदें बरसाओ मेघा

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०  सुषमा भंडारी  ०  तप्त धरा पर सावन की बूंदें बरसाओ मेघा माटी की सौंधी खुशबु को लेकर आ जाओ मेघा नव बसन्त- सा हर्षित हो मन ऐसे गुनगुनाओ मेघा तप्त धरा पर सावन की बूंदें बरसाओ मेघा।।।। मस्त पवन के झोंको के संग नाचे जब पत्ता- पत्ता भीषण गर्मी की इक पल में धूमिल हो सारी सत्ता मन चंचल हिरनी -सा दौडे मेघों में बन जाओ मेघा तप्त धरा पर सावन की बूंदे बरसाओ मेघा।।।। धरा का आँचल यूं लहराये जैसे मोर पांखुरी- सी रिमझिम बूंदों के अधरों पर कान्हा की बांसुरी- सी बूँदे बनकर ख्वाब कृषक के आन सजा जाओ मेघा तप्त धरा पर सावन की बूंदें बरसाओ मेघा।।।।। एहसासों संग भीगूं मैं भी और करूं श्रिंगार भी तप्त धरा हो जाये पुलकित खूब लुटाऊँ प्यार भी घुमड़- घुमड़ कर , उमड़- उमड़ कर अब तो आ जाओ मेघा तप्त धरा पर सावन की बूंदें बरसाओ मेघा।।

चार्ली चैपलिन द्वितीय की किताब "हंसता बचपन" का विमोचन

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० योगेश भट्ट ०  नयी दिल्ली : सृजनाभिनन्दनम द्वारा नई दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, अभिनेता, फिल्म निर्माता, कवि, लेखक, निर्देशक और चार्ली चैपलिन द्वितीय  डॉ. राजन कुमार विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर उनकी लिखी किताब हंसता बचपन का विमोचन भी हुआ। पुस्तक विमोचन के अलावा सृजनविभूति सम्मान और परिचर्चा का आयोजन भी किया गया।  प्रसिद्ध साहित्यकार मदन लाल मनचंदा को उनकी जन्म शताब्दी पर यह कार्यक्रम सादर समर्पित किया गया। मंच संचालन डॉ अल्पना सुहासिनी (एंकर अभिनेत्री एवं कवियत्री) और विभा राज वैभवी (एंकर, हिंदी साहित्य संस्थान अध्यक्ष) ने किया। हीरो राजन कुमार के अच्छे लेखनी के लिए मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया गया।

ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म-जन्म न उतरे

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०  सुषमा भंडारी  ०  ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म - जन्म न उतरे ----- मन को मीत ,तू ही मेरो प्रीतम तू ही मेरो श्याम प्रिय प्रेम गुलाल हाथ में लेकर हो जाऊं बदनाम प्रिय पोर पोर में नशा तुम्हारा जन्म जन्म न उतरे ------- ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म जन्म न उतरे------- तन भीगा मन भीगा साजन सिहर सिहर मैं जाऊं मस्त बयार के संग बहूँ मैं गीत खुशी के गाऊं जन्म जन्म का बंधन है ये जन्म जन्म न उतरे------- ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म जन्म न उतरे------ बहक रहें हैं नैन मेरे और खनक रहे हैं कंगन फागुन की टोली है आई अद्भुत रंग है तन मन। उड़ उड़ रंग गुलाल कहे है जन्म जन्म न उतरे---- ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म जन्म न उतरे----- टेसू के रंगों सी महकूँ दहकूँ मैं होली में लाड़ और मनुहार भरा है मेरी तो झोली में रंग प्रीत का श्यामल- श्यामल जन्म- जन्म न उतरे------ ऐसो रंग लगाओ कान्हा जन्म जन्म न उतरे------   दोहा गाल गुलाबी कर गये, तेरे वो दो नैन। दिवस हुए मदमस्त से, रातें हैं बेचैन।। खिल- खिल कर कहती कली तुझसे ये मुस्कान ओ भ्रमर ओ साँवरे, मैं बिल्कुल नादान।। रंग- बिरंगा हो रहा धरती का हर छोर मस्त- मस्त फागुन हुआ नाचे मन का मो

कहाँ नहीं विज्ञान बताओ कहाँ नहीं विज्ञान

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0  अंजू सचदेवा 0  कहाँ नहीं विज्ञान बताओ कहाँ नहीं विज्ञान भूत-भविष्य का ज्ञाता है , वर्तमान की शान भू गर्भ से लेकर ये अन्तरिक्ष तक जाये जैविक, भौतिक, मौसम और रसायन भी समझाये माटी के कण कण में सब है , पानी, हवा व आग करता है विज्ञान खुलासा, क्या है जीवन राग जीवन से मृत्यु तक का देता यही हिसाब क्या होती है मूल हकीकत क्या होता है ख़्वाब विविध समस्यायें हल करता सबका यही जवाब कण कण में विज्ञान छिपा है कण कण में विज्ञान

आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी को संस्कृत भाषा के लिए सन् 2024 का 'कर्तृत्व समग्र सम्मान '

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० योगेश भट्ट ०  नयी दिल्ली -  संस्कृत कवि, उपन्यासकार, नाट्यकार आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी को संस्कृत भाषा तथा साहित्य में योगदान देने के लिए राष्ट्रीय 'कर्तृत्व समग्र सम्मान 'से नवाजे जाने के कारण न केवल संस्कृत साहित्य ,अपितु हिन्दुस्तानी अदब तथा अनेक शैक्षणिक संस्थानों में भी खुशी का माहौल है।  भारतीय भाषा परिषद,कोलकाता की स्थापना भारतीय भाषा तथा साहित्य के उन्नयन के लिए सन् 1975 में की गयी थी और हिन्दुस्तानी भाषाओं तथा उनके साहित्यों का अधिक से अधिक संरक्षण तथा संबर्धन हो सके । इसी भावना को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए यह ' कर्तृत्व समग्र सम्मान ' वरिष्ठ तथा युवा भारतीय साहित्यकारों के लिए सन् 1980 में शुरू किया गया था।  इस साल का यह पुरस्कार संस्कृत भाषा तथा उसके साहित्य के उन्नयन में महनीय योगदान देने के लिए आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी के साथ हिन्दी (भगवानदास मोरवाल), पंजाबी (जसवीर भुल्लर), मलयालम (एम.मुकुंदन) भाषाओं को यह सम्मान दिया गया है । साथ ही युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन वर्धन के लिए आरिफ़ रजा ,संदीप शिवाजीराव जगदाले, गुंजन श्री तथा जसिंता केरकेट्टा को क्रमशः

नये रास्तों की तलाश में वर्तमान पीढी की लेखिकाओं ने अपने लेखन में घिसे पिटे जाल को तोड़ा : संतोष श्रीवास्तव

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०  जया केतकी ०  भोपाल -अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच पर महिला दिवस के उपलक्ष में "चुनौतियां एवं अवसर" विषय पर विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार , पत्रकार डॉ. प्रमिला वर्मा ने बताया "महाराष्ट्र के औरंगाबाद में महिला हक्क सम्मेलन हुआ था जिसमें 50,000 महिलाओं ने शिरकत की थी। सभी का यह कहना था कि हमें गुजारा भत्ता नहीं बल्कि "दांपत्य हक्क चाहिए।" वही साहित्यकार नीलम कुलश्रेष्ठ ने मुख्य अतिथि के आसंदी से गुजरात की महिलाओं की पीड़ा व्यक्त की तथा उसी से संदर्भित एक लघु कथा भी पढ़ी। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश पटवा ने अपनी बात रखते हुए कविता के माध्यम से महिलाओं की भूमिका को व्याख्यात किया। आरंभ में मध्य प्रदेश इकाई की अध्यक्ष महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने सभी का स्वागत किया और अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने प्रस्तावना वक्तव्य देते हुए कहा कि "नये रास्तों की तलाश में वर्तमान पीढी की लेखिकाओं ने अपने लेखन में घिसे पिटे जाल को तोड़ा है। "मंच पर चुनौतियां और अवसर विषय पर कुछ

इसरो के वैज्ञानिकों को समर्पित इंदु नांदल द्वारा चौथा विश्व रिकॉर्ड

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० आशा पटेल ०  जयपुर वासी एवं बिरला बालिका विद्यापीठ, पिलानी, झुंझुनूं की अकैडमिक कॉर्डिनेटर सावित्री धायल, इंदु नांदल, इंडोनेशिया निवासी भारतीय के प्रोत्साहन से इसरो के वैज्ञानिकों को समर्पित चौथे विश्व रिकॉर्ड पुस्तक की सह-सम्पादक बनी। सावित्री धायल, राजेंद्र सिंह धायल (पति), आस्था धायल विजय (बेटी), नीतेश विजय (दामाद), श्रीमाला धायल गुप्ता (बेटी), सार्थक गुप्ता (दामाद), डॉ उद्दिप्ता धायल (बेटी), स्कूल सहयोगी निशा पारीक, कल्पना सोनी समेत 12 छात्राओं ने कविताएं लिखकर चंद्रयान-3 पर आधारित विश्व रिकॉर्ड बनाने में इंदु नांदल का सहयोग किया।   इस विश्व रिकॉर्ड स्थापित पुस्तक प्रधानमंत्री, इसरो के वैज्ञानिकों, विभिन्न दूतावासों, पुस्तकालयों को भेंट किया जाएगा। इस विश्व रिकॉर्ड का उद्देश्य भारत के चाँद पर तिरंगा फहराने के पलों को अमर बनाने का है। इंदु नांदल भारत पर 4 विश्व रिकॉर्ड बना चुकी हैं । वे लगभग 30 वर्षों से विदेश में रह रही है । उन्होंने 3 विश्व रिकॉर्ड जर्मनी में व 1 विश्व रिकॉर्ड इंडोनेशिया में रहते हुए बनाया । 2008 से 2020 तक इंडोनेशिया में अध्यापिका के रूप में कार्य किया और विद्या

विश्व पुस्तक मेले में हुआ 'इस मीडिया समय' का लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली। साहित्यकार गिरीश पंकज का कहना है कि संजय द्विवेदी भारतीय मीडिया के अप्रतिम विमर्शकार हैं। वे समाधानपरक पत्रकारिता और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के ध्वजवाहक भी हैं। पंकज यहां विश्व पुस्तक मेले में प्रो.संजय द्विवेदी की नई किताब 'इस मीडिया समय' का लोकार्पण कर रहे थे। पुस्तक का प्रकाशन संस्मय प्रकाशन, इंदौर ने किया है। उन्होंने कहा संजय की यह किताब मीडिया और हमारी भाषा के सामने उपस्थित संकटों पर बात करती है। व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि संजय का जीवन और लेखन नयी पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक उदाहरण है। संजय अपने लेखन में समावेशी हैं और जीवन में लोकसंग्रही। उन्होंने कहा कि संजय की सृजनात्मक सक्रियता अप्रतिम है। लोकार्पण अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.अविनाश वाजपेयी, प्रो.पवित्र श्रीवास्तव, हिंदी की प्राध्यापक और कथाकार डा.पूनम सिंह, भाजपा नेता गणेश मालवीय, राष्ट्र पत्रिका (नागपुर) के संपादक कृष्ण नागपाल,  मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष अर्पण जैन, भावना शर्मा,भारतीय जन संचार संस्थान के डा.राकेश उपाध्याय,डा.पवन

विश्व पुस्तक मेले में शिव दयाल द्वारा संपादित जेपी आंदोलन और भारतीय लोकतंत्र पुस्तक लोकार्पित

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० आशा पटेल ०  नई दिल्ली । वरिष्ठ साहित्यकार शिवदयाल द्वारा संपादित किताब 'जेपी आन्दोलन और भारतीय लोकतंत्र ' का विश्व पुस्तक मेला में लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर समाज वादी नेता रघु ठाकुर, प्रोफेसर आनंद कुमार और लेखक शिवदयाल द्वारा पुस्तक का लोकर्पण किया गया। लोकार्पण समारोह में सभी विद्वानो संबोधित किया। इस अवसर पर प्रोफेसर आनन्द कुमार ने शिवदयाल को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक शिवदयाल द्वारा रचित जयप्रकाश नारायण के विचार और आंदोलन के संदर्भ में तीसरा योगदान है।‌ यह पुस्तक सेतु प्रकाशन की ज्ञान ‌श्रृंखला में जयप्रकाश‌ नारायण के चिंतन-मंथन में से 43 प्रसंगों के संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका के साथ 528 पृष्ठों का एक वृहद संकलन है। साथ ही शिवदयाल जी का बिहार आंदोलन से जुड़ा एक और उपन्यास 'एक और दुनिया होती '(अनन्य प्रकाशन) द्वारा प्रकाशित हो चुका हैं। प्रोफेसर आनन्द ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन की इस अर्ध शताब्दी वर्ष की शुरुआत में ही एक साथ तीन पुस्तकें महत्वपूर्ण योगदान है। शिवदयाल जी ने जेपी द्वारा स्थापित छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के माध्यम

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024, साहित्यिक मैराथन का समापन

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० आशा पटेल ०  जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024, का 5-दिवसीय साहित्यिक मैराथन का समापन हुआ| फेस्टिवल में संस्मरण से लेकर स्पोर्ट्स, हिस्ट्री से माइग्रेशन और फूड से लेकर कई विषयों पर बात हुई| अंतिम सुबह की शुरुआत सप्तक चटर्जी के प्रदर्शन के साथ हुई, जो तीसरी पीढ़ी के हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक थे, जिन्होंने अपने शास्त्रीय वायलिन से मधुर धुनें बजाईं। सत्र ‘शाहजहानाबाद: ऑन देल्ही’स ब्रोकन हिस्ट्री’ में तीन इतिहासकारों, स्वप्ना लिडल, राणा सफवी और विलियम डेलरिम्पल ने शाहजहानाबाद/दिल्ली के इतिहास पर दिलचस्प चर्चा की  इतिहासकार और लेखिका स्वप्ना ने कहा, “अभी हाल ही में प्रकाशित मेरी किताब (शाहजहानाबाद) मेरे दिल के काफी करीब है| उसमें अकबर द्वितीय और उनके पुत्र बहादुर शाह ज़फर द्वितीय के जीवनकाल को वर्णित किया गया है|” शाहजहाँ ने 17वीं सदी में शाहजहानाबाद की स्थापना की थी, जो वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली है| लेखिका राणा सफवी ने दिल्ली पर छह किताबें लिखी हैं, “मुझे अतीत को देखना और वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता तलाशना अच्छा लगता है|” हाल ही में मेहरौली, दिल्ली में प्रशासन द्वारा गिराई गई म

उपन्यास 'इक्वेशन्स' के हिंदी अनुवाद 'सियासत' का जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हुआ लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली . शिवानी सिब्बल के पहले बहुचर्चित उपन्यास ‘इक्वेशंस’ (Equations) के हिन्दी संस्करण ‘सियासत’ का लोकार्पण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हुआ। इस कार्यक्रम में लेखक शिवानी सिब्बल, वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला गर्ग, अनुवादक प्रभात रंजन, राजकमल प्रकाशन समूह के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम और कार्यक्रम सूत्रधार मीता कपूर उपस्थित रहे। लोकार्पण के बाद लेखक और अनुवादक से मीता कपूर ने इस उपन्यास पर बातचीत की। इस मौके पर कार्यक्रम की सूत्रधार मीता कपूर ने कहा कि जब मैंने किताब के अनुवादक प्रभात रंजन से पूछा कि इस किताब के अनुवाद का ख़याल आपके मन में कैसे आया तो उन्होंने कहा कि जैसे ही मैंने इस किताब को पढ़ना शुरू किया मुझे लगा, जैसे यह किताब अनुवाद की प्रतीक्षा ही कर रही है। हिंदी की वरिष्ठ लेखक मृदुला गर्ग ने कहा कि यह शिवानी के लिए एक मुबारक दिन है। जब किसी की पहली किताब मुकम्मल होती है तो वह उसके लिए मुबारक दिन होता है।  फिर जब पहली किताब छप कर आती है तो भी मुबारक दिन होता है। और जब उसका अनुवाद होता है तो वह भी मुबारक दिन होता है। यही बात मेरी पहली किताब के पूरा होने पर कृ

पुस्तक ‘सत्य व अहिंसा अनुगामी-महात्मा गांधी’’का लोकार्पण

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० आशा पटेल ०  जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में स्वच्छ नगर संस्था जयपुर द्वारा प्रकाशित ‘‘सत्य व अहिंसा अनुगामी-महात्मा गांधी’’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। पुस्तक में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी स्व.डाॅ.सत्यनारायण सिंह द्वारा महात्मा गांधी के बहुआयामी व्यक्तित्व के संबंध में लिखे गये लेखों का संकलन है। इन लेखों का संपादन वरिष्ठ लेखक व पत्रकार देवीसिंह नरूका द्वारा किया गया है। पुस्तक में महात्मा गांधी का जीवन दर्शन, गांधी का राष्ट्रवाद, सत्य व अहिंसा, भारत छोड़ो आन्दोलन, गांधी की दांडी यात्रा, महात्मा गांधी व नारी सशक्तिकरण, गांधी की धार्मिकता, महात्मा गांधी और सरदार पटेल, महात्मा गांधी का हिन्दुत्व आदि विविध सारगर्भित लेख हैं। इस अवसर पर पार्थो सान्याल शिक्षाविद, डाॅ. परिक्षित सिंह, यू.एस.ए., प्रो. बी.एम.शर्मा कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष,  एम.एस.कुमावत बीएसएफ एवं सी.बी.आई. के पूर्व प्रमुख, वी.पी.सिंह पूर्व आई.पी.एस., फारूक आफरिदी वरिष्ठ साहित्यकार, आशा पटेल संपादक-वाणिज्य सेतु, प्रदीप पांडे पूर्व चीफ टाउन प्लानर, श्रीमती निर्मला सिंह, डाॅ. र

जन-जन में सद्भावना , हो ज्यूँ बहता नीर

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०  सुषमा भंडारी  ०  गणतन्त्र कहता सदा , न हो कोई गुलाम। आजादी के वास्ते , अमर अनेकों नाम।। पावन है अति पर्व ये, है अपना गणतन्त्र। जन जन के ह्रदय बसा, ये ही इसका मंत्र।। भाषा अपने देश में , कोस कोस पे भिन्न। भाई चारा एकता, इक दूजे के अभिन्न।। आंखों में रहता सदा , भारत माँ का रूप। गंगधार छल छल करे, भाये उजली धूप।। आजादी का पर्व है , लिए खुशी का ज्वार। फाँसी पर चढ़ सूरमा , दे गये ये संसार।। बर्ष 24 शुभ बहुत, आये घर पर राम। हुई अयोध्या जगमगी, जय जय सीया राम।।

ग़ज़लों और रुबाइयों के संग्रह ‘चलो टुक मीर को सुनने’ का लोकार्पण

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली. रेख्ते के मशहूर शायर मीर तक़ी मीर की 300वीं वर्षगांठ पर अंजुमन तरक्की उर्दू (हिन्दी) द्वारा इंडिया हैबिटैट सेंटर में ‘अगले जमाने में कोई मीर भी था’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मीर तक़ी मीर की 1500 से अधिक ग़ज़लों और चुनिन्दा रुबाइयों के संग्रह ‘चलो टुक मीर को सुनने’ का लोकार्पण हुआ। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब का सम्पादन विपिन गर्ग ने किया है। लोकार्पण के दौरान मंच पर अंजुमन तरक्की उर्दू (हिन्दी) के जनरल सेक्रेटरी अतहर फ़ारूक़ी, दास्तानगो मोहम्मद फ़ारूक़ी, सदफ़ फातिमा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रो. अहमद महफ़ूज, किताब के सम्पादक विपिन गर्ग, राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहे। किताब के लोकार्पण के बाद दास्तानगो महमूद फ़ारूक़ी और दारेन शहीदी ने मीर की ज़िन्दगी पर आधारित दिलचस्प दास्तान ‘दास्तान-ए-मीर’ सुनाई। ‘चलो टुक मीर को सुनने’ संग्रह के सम्पादक विपिन गर्ग ने कहा कि मीर ने शायरी की सभी विधाओं को आज़माया लेकिन उनका पसंदीदा शगल ग़ज़ल-गोई है। मीर ने ग़ज़लों में तक़रीबन 14-15 हज़ार शे’र कहे हैं। इसी क

साहित्य के महाकुम्भ में देश-दुनिया के 550 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार हिस्सा लेंगे,

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० आशा पटेल ०  जयपुर। 1 से 5 फरवरी को जयपुर में होने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है|  फेस्टिवल के प्रोडूसर, टीमवर्क आर्ट्स ने मीडिया को फेस्टिवल के 17वें संस्करण के विषय में विस्तार से बताया| साहित्य के इस महाकुम्भ में देश-दुनिया के 550 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार हिस्सा लेंगे, और इसमें 16 भारतीय और 8 अंतर्राष्ट्रीय भाषाएं प्रस्तुत की जाएंगी| भारतीय भाषाओँ में शामिल हैं: असमी, अवधी, बंगाली, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, कुरुख, मलयालम, ओड़िया, पंजाबी, राजस्थानी, संस्कृत, तमिल, तोड़ा, उर्दू और बंजारा भाषा – लामानी (लम्बाडा)| फेस्टिवल में साहित्य की श्रेष्ठ प्रतिभाओं को सम्मिलित किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं: नेशनल जिओग्राफिक की यूरोप और पश्चिमी एशिया में रीजनल मैनेजर, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में ऑनरेरी फेलो और सिल्क: ए हिस्ट्री इन थ्री मेटामोर्फेस की लेखिका आरती प्रसाद; भूतपूर्व इंडियन क्रिकेटर और कमेंटेटर अजय जड़ेजा; ब्लॉकबस्टर बाहुबली त्रयी, असुर: टेल ऑफ़ द वेन्क़ुइश्ड और अजय सीरिज के लेखक आनंद नीलकंठन; बैड न्यूज़: लास्ट जर्नलिस्ट इन ए डिक्टेटरशिप और स्ट्रिंगर: ए रि