मंत्रों से भूत भाग जाते हैं तो पाकिस्तानियों पर भी नियंत्रण कर दो ताकि राफेल न मंगाना पड़े


एक सप्ताह पूर्व स्वच्छता अभियान के लिए लोगों ने झाड़ू गली गली साफ सुथरी गलियों में घुमाई किंतु कल की दीवाली की गंदगी कब साफ होगी, ये न्यूज से मालूम होगा। एक चेहरा ऐसा भी है जो भूत भगाता है ये निशाचर रात्रि में सड़कों के किनारे पेड़ों तले, चौराहे पर लाल पीली रंगोली सजाकर सारी लत्ते कपड़े की दुकान छोड़ चले जाते हैं एक ओर किसी का हित करने की बात करते हैं दूसरी ओर अनजान व्यक्ति उस घेरे में संदेह संतप्त हो जाता है। यदि इन के मंत्रों से भूत भाग जाते हैं तो पाकिस्तानियों पर भी नियंत्रण कर दो भाई ताकि राफेल न मंगाना पड़े।


दीपावली पर समस्त देशवासियों को हर एक बधाइयां अर्पित कर रहा है। हमारे प्रधानमंत्री देश रक्षा में जवानों के बीच दीवाली मना रहे हैं। उनका संदेश समस्त देशवासियों की ओर से माना जाता है आप की बधाई सारे जन मानस की बधाई है। सारा देश प्रकाशमय  बना हुआ है। चाहे अयोध्या हो या स्वर्णमंदिर प्रकाश में नहा रहा है। देश के प्रथम नागरिक माननीय राष्ट्रपति  का संदेश  सम्पूर्ण देश के लिए दीपावली का ज्ञान मय मिलन है।


आज आवश्यकता है दीपावली पर अज्ञान का ज्ञान पर, अंधकार का प्रकाश पर द्रुभाव का सद्भाव पर अलगाव का संगठित होकर रहने पर हर धर्म जाति का अपने देश का विकास, उसकी रक्षा पर न्योछावर  का प्रणवत होना है। किन्तु दीवाली के प्रात;का जो दृश्य शहरों में फैली गंदगी से दिखाई देता है वह वातावरण की दिशा को जमीन पर ही नही आकाश तक दिखाई देता है। प्रसन्नता व्यक्त करना और उसके दुरुपयोग पर स्वयं को हानि पहुंचाने को दृष्टिगत करना होगा। देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान चलाते हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री विनय करते दिखे जाते हैं फिर इस प्रकार कोर्ट तक की अवहेलना जहां होती है क्या इसी को स्वतंत्र भारत कहते हैं,?


हम जब किसी को काम करने की आज्ञा देते हैं और वह उसे टाल दें या अनसुना कर दे,तव आप को या मुझे बुरा ही नहीं अपना अपमान भी नजर आता है।जिन लोगों के पीछे देश का शासन तंत्र चलता है फिर हम उन्हें ही आलोचना के शिकार बनाते हैं पूजा मन से होती है आस्था का दीप मन है लाखों फूल और दीपक  गंगा जी में अर्पित कर आप मां गंगा को नहीं अपने मन को मलिन कर रहे हैं, इसी लिए आपका मलिन मन बार बार मां गंगा में बसा हुआ रहता है।कहा गया है।
     ।मन चंगा कटौती में गंगा .


अगली एक अनोखी परम्परा है समाज के प्रतिष्ठित लोगों नेताओं को बड़ी से बड़ी माला द्वारा अभिमंत्रित करना,जो पुष्प सिर श्रृंगार करते हैं पलभर में पद दलित हो कर अपमानित हो जाते हैं। अगला दृश्य पीपल और बरगद जैसे पवित्र  बृक्ष महात्माओं का है  कल के दीपक प्रतिमाएं और भीतर की समस्त  पूजा सामग्री उनके चरणों में अर्पित है। आपने जो किया उसका फल इन बृक्षो को भोगना पड़ता है ये जहां स्वयं सांस नहीं ले पाते वहां हमें कैसे देंगे। इनकी जड़ों को चूहे काट काट कर नष्ट करने का काम करते हैं सड़ी गली पूजा सामग्री की गंध आपको नहीं इन जीव आत्माओं  के नासिका में पहले जाती है फलस्वरूप पत्ते गिरने और बृक्ष सूख जाते हैं।


स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रातःकाल भ्रमण पार्क में लाभकारी है रात्रि शैलानियों का वहां जो टेवलों और बेंचौ पर कूड़ा छोड़ रखा होता है बेचारे अपंग बृद्धों के लिए आसन विहीन बना डालता है।पार्क के चौकीदार कहां रहते हैं ये तो पार्क संरक्षण वाले ही जान सकते हैं उपरोक्त के संदर्भ में मैं नास्तिक भी नहीं हूं हां आडम्बर रहित अवश्य हूं। साथ ही आदर्शवादी भी नहीं बनना चाहता।केवल एक निवेदक हूं कि हमें मन से पवित्र होना चाहिए दिखावा क्षणिक होता है। वैसे कई लोग कहते हैं मन को कौन देखता है।हम तो यही कह सकते हैं सागर में ऊपर आप लहरों के साथ सब कुछ दिखाई देता है लेकिन रत्न गहराई में ही मिलते हैं।