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अप्रैल 6, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ऑनलाइन लर्निंग उपलब्ध कराने के लिए टीसीएल ने टॉपस्कॉलर्स के साथ भागीदारी की

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नई दिल्ली : दुनिया की नंबर -2 टीवी कंपनी टीसीएल पहली बार स्मार्ट टीवी की अपनी अत्याधुनिक रेंज में बच्चों के लिए ऑनलाइन होम लर्निंग सॉल्यूशंस लेकर आ रही है। टीसीएल ने अपने सभी यूजर्स के लिविंग रूम्स में इनोवेटिव लर्निंग सॉल्युशंस की रेंज लाने के लिए स्मार्ट लर्निंग ऐप टॉपस्कॉलर्स के साथ भागीदारी की है। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन ने ब्रांड्स को नए और इनोवेटिव सॉल्युशंस लेकर आने के लिए प्रेरित किया है। साझेदारी के बाद टीसीएल के 1 मिलियन से अधिक ग्राहकों को टॉपस्कॉलर्स से होम लर्निंग सॉल्युशन प्राप्त होगा। स्मार्ट लर्निंग ऐप ने विभिन्न आयु समूहों के लिए ऑनलाइन कोर्सेस और लर्निंग मटेरियल्स समर्पित किया है, जिसमें किंडरगार्टन से 12वीं तक के बच्चे शामिल है। इसके अतिरिक्त टॉपस्कॉलर्स ने सभी टीसीएल ग्राहकों को 30 दिन मुफ्त/सौजन्य सेवा प्रदान की है।   टीसीएल के कंट्री मैनेजर माइक चेन ने कहा, "लॉकडाउन के बीच माता-पिता की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है घर में बच्चों के लिए सीखने का माहौल सुनिश्चित करना। इस भागीदारी से हम टीसीएल स्मार्ट टीवी की अत्याधुनिक र

लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच जमकर की आतिशबाज़ी

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वैश्विक महामारी के खिलाफ दीपक दिलदार ने की जरूरतमंद लोगों की मदद

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पटना -वैश्विक महामारी के खिलाफ देश में चल रहे संपूर्ण लॉकडाउन के 12 वें दिन भोजपुरी सिंगर – एक्‍टर दीपक दिलदार ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच राशन और भोजन बांटा। इस दौरान उन्‍होंने कई लोगों को आर्थिक मदद भी की। लोगों को मास्‍क और साबुन भी दिया। उन्‍होंने लोगों को लॉकडाउन के बारे में जानकारी भी दी और रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कदम में भी सबों को साथ चलने को कहा ।   उन्‍होंने कहा कि नर की सेवा ही मानव सेवा है। आज हम सबों को साथ रहने की जरूरत है। जो भूखे हैं उन्‍हें खाना खिलाना संपन्‍न लोगों की जिम्‍मेदारी है। यह हमारा सामाजिक दायित्‍व भी है, जिसका निर्वहन मैं कर रहा हूं। अभी मैंने कई जरूरतमंद लोगों की मदद की। उनकी सेवा करने का सौभाग्‍य मिला। मैं महादेव से प्रार्थना करता हूं कि हमारा देश जल्‍द से जल्‍द कोरोना से छुटकार मिले और स्थिति पहले की तरह हों। इसके अलावा मैं अपने फैंस को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने 11 दिनों तक घर में रहकर कोरोना को मात देने का काम किया है। थोड़ और सब्र करें। हम कोरोना को जरूर हरायेंगे। हम साथ हैं और सभी साथ रहेंगे।  

कोयरफिट मैट्रेस 25000 हैंड सांइटिज़ेर डोनेट करेगा

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नयी दिल्ली - कोइरफिट मैट्रेस ने कोविद-19 की समस्या से लड़ने के लिये अपने नए प्लान #प्रोजेक्ट सैनिटाइज के तहत 25000 सैनीटाइज़र डोनेट करने का फैसला किया है। मार्किट में सैनिटाइजर की किल्लत और ब्लैक में बेचे जाने के कारण आम आदमी को सैनिटाइजर आसानी से सही दाम में उपलब्ध नही हो पा रहा। इसलिए अपने देशवासियों की सहायता के लिये कोइरफिट मैट्रेस ने ये प्रण लिया है कि हम अपनी तरफ से ये सैनिटाइजर, मास्क आदि देश के विभिन्न शहरों और गांवो में मुफ्त उपलब्ध कराएंगे। “इस आपदा के समय में हम सबको मिलकर अपने देश एवं देशवासियो की हर संभव मदद करनी चाहिए एकजुट होकर मानवता के लिए खड़े होने का समय है, और इसके लिए हम पूरी तरह से कर्तव्यनिष्ठ हैं। इसलिए हमने 25000 सैनिटाइजर , मास्क, ग्लव्स आदि देश भर में मेडिकल स्टाफ, सरकारी कर्मचारी तथा पब्लिक को मुफ्त उपलब्ध कराने का फैसला किया है "- निर्भय गुप्ता सी.ई.ओ कोइरफिट मैट्रेस कोइरफिट मैट्रेस के बारे में : कोइरफिट मैट्रेस इम्दुस्ट्री में एक जाना माना नाम है। 31 साल से कोइरफिट सबसे सुविधाजनक और बेहतरीन क्वालिटी के मैट्रेस बनाने के लिये मशहूर है। आज देशभर में हम

जीवन की एक चुभन

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विजय सिंह बिष्ट लौटूं तो कैसे लौटूं सारे पथ भूल चुका हूं। जन्म लिया था जहां वहां छोड़ चुका हूं।। सजाया था जिन घरों को खंडहर कर आया हूं। लौटूं तो कैसे लौटूं सारी राहें तोड़ चुका हूं।। जीवन की आपाधापी में सारे सपने भूल चुका हूं। नाते रिस्ते तो दूर जन्म दाताओं को छोड़ चुका हूं। गांव गलियारों में जहां खेला छोड़ चुका हूं।। महलों की चाहत में श्यामल धरती छोड़ चुका हूं। लौटूं तो कैसे लौटूं सारे पथ भूल चुका हूं।। मंदिरों की मधुर घंटियां देवालय भूल चुका हूं। कोलाहली दुनियां में मैं स्वयं को खो चुका हूं। कैसे लौटूं उन राहों में जिनको मैं छोड़ चुका हूं। सपने आते उन खेतों के जिन्हें बंजर कर आया हूं। जननी जन्मभूमिश्च कैसे बोलूं जिसकी ममता छोड़ चुका हूं।। अपनी माटी अपनी धरती उसको भूल चुका हूं। कैसे लौटूं जिसको तन मन से भूल चुका हूं।। कैसे लौटूं मां की उस गोदी में जिनको भूल चुका हूं।। संम्बन्धों की वह भूल भुलैया छोड़ कर आया हूं। नकली नाते रिश्ते जोड़े जिन्हे समझ नहीं पाया हूं। नयी उमंगें अपना कर पुरानी यादें भूल चुका हूं।। सबसे बड़ा गम खाये जाता संस्कारों को भूल चुका हूं। लौटूं तो कैसे लौटूं सार

महामारी से बचने के लिए गीत के माध्यम से संदेश

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