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अप्रैल 1, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पीएम केयर फंड में 500 करोड़ देने की घोषणा की

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मुंबई - इसके अलावा 5-5 करोड़ रु रिलायंस महाराष्ट्र और गुजरात मुख्यमंत्री राहत कोष में भी देगी रिलायंस। 5 लाख लोगों को अगले 10 दिनों तक खाना भी मुहैया कराया जाएगा। यानी 50 लाख के करीब खानों का इंतजाम किया जा रहा है। इससे पहले रिलायंस फाउंडेशन ने 100 बिस्तरों का पहला कोवड-19 अस्पताल मात्र 2 हफ्तों में तैयार किया था। रिलायंस 1 लाख मास्क और हजारों की संख्या में PPE पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट भी तैयार कर रहा है। ताकि देश के स्वास्थ्यकर्मियों का ख्याल रखा जा सके। इमरजेंसी वाहनों में फ्री ईंधन और डबल डेटा की रिलायंस पहले से ही उपलब्ध करा रहा है। प्रधानमंत्री राहत कोष 500 करोड़ रु   महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष 5 करोड़ रु गुजरात मुख्यमंत्री राहत कोष 5 करोड़ रु 100 बिस्तरों का कोविड-19 अस्पताल पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) 5 लाख जरूरतमंदों के लिए हर रोज खाना रोजाना 1 लाख फेस मास्क का उत्पादन रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, “हमें विश्वास है कि भारत कोरोनो वायरस की आपदा पर जल्द से जल्द विजय प्राप्त कर लेगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज की प

' राम से बड़ा राम का नाम '

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सुरेखा शर्मा,लेखिका /समीक्षक "रोम रोम में बसने वाले राम "                                   ' सिया राममय सब जग जानी                                  करहूं प्रणाम जोरि जुग पानी।             एक बार भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं कि हे पार्वती ! जब कोई  'र ' अक्षर से आरंभ होने वाले किसी भी शब्द का उच्चारण करता है तो मेरा मन आनंद से अभिभूत हो जाता है, मुझे यही आभास होने लगता है कि वह हमारे परमप्रिय स्वामी भगवान राम का ही नामोच्चार कर रहा है---           रकारादीनि नामानि शृण्वतो मम पार्वती            चेतः प्रसन्नतां याति रामनामाभिशंकया।। 'राम' शब्द  का उच्चारण करने मात्र से  तन और मन में एक अलग तरह की अनुभूति होती है ,जो हमें आत्मिक शांति देती है।संतों-महात्माओं ने राम का नाम जपते- जपते मोक्ष प्राप्त कर लिया ।तभी तो कहा है----                                                राम नाम की लूट है,   लूट सके  तो  लूट                            अंत काल पछताएगा, जब प्राण जाएंगे छूट ।          'राम' शब्द  का अर्थ है रमति इति राम: ,     राम रामेति रामेति रमे

कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने के लिए ‘स्टेज़ फॉर सरवाईवर्स’ अभियान लॉन्च

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नयी दिल्ली । लोगों के स्वास्थ्य पर आए इस अप्रत्याशित संकट के समय हैल्थकेयर समुदाय को सहयोग देने के लिए मेकमाईट्रिप (NASDAQ: MMYT), ने ‘स्टेज़ फॉर सेवियर्स’ अभियान लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य कोविड-19 से अग्रिम कतार में लड़ाई लड़ रहे मेडिकल कर्मियों को अस्थायी आवास उपलब्ध कराना है। यह अभियान होटल चेन एवं स्वतंत्र होटलों के साथ साझेदारी में प्रस्तुत किया गया है, जो 26 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में काम कर रहे हैल्थकेयर क्षेत्र के इन नायकों का सहयोग करने के लिए एकजुट हुए हैं। यह अभियान मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को मेकमाईट्रिप ऐप पर भारत के 200 शहरों में स्थित 900 से ज्यादा होटलों में कमरे देखकर उन्हें बुक करने की सुविधा देगा। ‘स्टेज़ फॉर सेवियर्स’ अभियान द्वारा अनेक प्रतिष्ठित होटल चेन, जैसे द पार्क होटल्स, आईएचजी, जिंजर होटल्स, ट्रीहाऊस, लेमन ट्री होटल्स, ओयो होटल्स, कीज़ ग्रुप, सरोवर होटल्स, रॉयल ऑर्किड, सिट्रस ग्रुप, इंटैलिस्टे, जुस्टा, गोल्डन टुलिप होटल्स चेन, लीव्यू ग्रुप एवं सैकड़ों स्वतंत्र होटल्स ने भारत में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष थैंकयू दरों पर होटल के कमरे देना शुरू कि

" लाल चुनरी "

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सुरेखा शर्मा ,लेखिका /समीक्षक "जोर से बोलो ,जय माता दी,  सारे बोलो••• जय माता दी, मैं नहीं सुणया जय माता दी •••जयकारा ए शेरां वाली दा••••"आगे से किसी भक्त ने जोर से आवाज लगाई तो पीछे से भी सुर में सुर मिल गया और सब जोर से बोल पड़े " बोल साँचे दरबार की जय••••।"    देवी माँ के  नवरात्रों में  मनसा देवी माँ के मन्दिर में धूम मची थी।माता के भक्तों की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी ।दर्शन करने वालों की कतार लंबी होती जा रही थी।भीड़ मेें फंसी 70-75 साल की वृद्धा अपनी आठ दस वर्ष की पोती के साथ  कतार में लगी हुई थी ।भीड़ को देखकर लग रहा  था आज ही दर्शन करके माँ की कृपा बरसेगी सभी पर।     अभिनव भी अपनी माँ और बहन के साथ रात के दो बजे से दर्शन के लिए  में खड़ा था ।दर्शनार्थी थे कि आगे सरक ही नही रहे थे।उसे स्वयं पर गुस्सा भी आ रहा था कि क्यों नहीं मम्मी और दीदी को मना कर सका।जबकि आज उसकी बहुत ही जरूरी मीटिंग थी।नई -नई नौकरी लगी थी।समय पर नहीं पहुंचा तो क्या प्रभाव पड़ेगा ।मम्मी के आदेश को वह टाल न सका इसलिए उसे आना पड़ा ।मम्मी को विश्वास था कि यह नौकरी माता की कृपा से ही लगी है।सो

पैसा नहीं,रोज़गार नहीं,घर वापस न जाएं तो कहां जाएं

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ज़रूरतमंदों को भोजन के पैकेट और अनाज का वितरण

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Jamaat हो या Madarsa सभी को क़ानून का पालन करना चाहिए

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लोगों से कहा समस्या गंभीर है

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