संदेश

रंग चढ़यो अबीर गुलाल...सखींन...

प्यार रंग गहरा बहुत फीकी होती जंग

खेलूंगी मैं कैसे होली कौन जरेगा हाय ठिठोली 

बचपन की यादों में होली

होली आई रे कन्हाई रंग बरसे......सुना दे जरा बाँसुरी '

डॉ० मुक्ता की पुस्तक पर हिंदी साहित्य के दिग्गजों ने कहा

भारी बारिश में भी महिलाएं डटी रहीं