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सितंबर 30, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज जो मुकाम मिला है मेहनत और मजबूत इरादे की देन है-अभिनेता" के के गोस्वामी

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गबरू,भूत अंकल टिंगू,और पप्पू पास हो गया,संकटमोचन महाबली हनुमान,भाभी जी घर पर हैं,शक्तिमान खली बली [ डबल रोल ],कमसिन : द अनटच्ड,ज्वाला,इश्क़ समंदर जैसे अनेक हिंदी / भोजपुरी फिल्मों में तथा टीवी सीरियल में के के गोस्वामी  का अभिनय आप लोग देख चुके हैं.साथ ही आजकल धारावाहिक "बगल वाली जान मारेली" में, के के गोस्वामी की एक्टिंग की खूब चर्चा हो रही है।  बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले के के गोस्वामी ने अपनी कॉमेडी और अभिनय के बल पर खुद की एक अलग पहचान बना रखी है। अपने जीवन के बारे में बताते हैं बहुत संघर्षशील मेरा मुकाम रहा पर रात दिन अथक प्रयास से यह मुकाम हासिल किया है भोजपुरी / हिंदी फिल्म हो या कोई टीवी सीरियल के के गोस्वामी की कॉमेडी भूमिका और इनकी कद काठी निभाए दर्शकों को अपनी एक्टिंग से लोटपोट करते रहते हैं. वह कहते हैं चाहे रोल कुछ भी बस हुनर हो तो वह पर्दे पर खूब सराही जाती है एक अच्छे कलाकार की यही प्रतिभा होती है। जो सीन, जो कॉमेडी मिले उसमें डूब कर वास्तविक जिंदगी की तरह कैमरे के सामने पेश करे।  अपने जीवन के बारे में बताते हैं कि बहुत संघर्ष और अथक प्रयास से यह

मातृशक्ति का सम्मान हमारा धर्म हो

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विजय सिंह बिष्ट   या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। नवद्धाशक्ति में मां के प्रकाट्य रूपों की अनेक प्रकार से स्तुति वंदन का विधान है  सभी कालों भूत, वर्तमान और भविष्य में सर्व सम्पन्न मां को ही नतमस्तक होकर वंदना अर्पण किया गया है। आदिकाल से कुंवारी कन्याओं के वंदन पूजन और जिवाने की प्रथाएं यत्र तत्र सर्वत्र  चली आ रही हैं।         ।नारी सर्वत्र पूजियेत। यह भी इंगित करता है कि निरन्तर चलने वाली आपकी सभी शक्तियों को मै नमन करता हूं जिसकी पूजा प्रतिष्ठा नव रात्राओं में विभिन्न प्रकार से प्रतिपादित की जाती है। नारी की पूजा सृष्टि के आरंभ से की जाती है जो जननी है रत्नगर्भा है। जिसने अपने उदर से संत,महान योद्धा, और विदुषी एवं विद्वानों को जन्म दिया है।       जो सहन शीलता की धरती, ज्ञान की गरिमा, अभिमन्यु की गर्भ में संस्कार स्वरूपा, लक्ष्मी ,रौद्र रूपा महाकाली, अभिज्ञान शाकुन्तलम की रचयिता, ये सभी गौरी , शक्ति, दुर्गा,हर युग में झांसी की रानी, सीता,राधा , द्रोपदी बन कर आती हैं और आती रहेंगी। नारी भोगने की नहीं पूजा की पात्रा हैं। राधा कृष्ण, स

नारी का नाम नवधाभक्ति के रूप में मिल जायेंगे

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विजय सिंह बिष्ट   प्ररेणा दायक घरवाली से,धन शोहरत मान बढाई घर की लक्ष्मी से मिलती है एक कहानी आती है दो साथी कहते हैं तेरी नाक कहां है एक ने कहा मेरी नाक घर में है दूसरे ने कहा मेरी मेरे पर ही है। फिर दोनों ने परीक्षा के लिए एक दूसरे के घर को चुना।जिसकी अपने पर थी वह घर वाले के घर गया, नमस्कार आदि के बाद उसने घरवाले भाई के बारे में पूछा , उसकी घरवाली ने कहा वे दो दिन के बाहर गए हैं। आप बैठो उसने पूर्ण आवाभगत के साथ उसकी सेवा  की, कहा आ जायेंगे, आप ठहरें वे नहीं है तो मैं तो हूं, यदि आप चले गएऔर वे सुनेगे कि आप आये थे वे नाराज होंगे। आप को कोई परेशानी नहीं होगी।वह वहीं ठहर गया।  दूसरा उस के यहां गए जिसने कहा था मेरी मेरे पर ही है, वहां जाकर वह उसकी पत्नी से मिला उसने  औपचारिक रूप से सेवा अभिवादन किया , वह बोली वह घर में नहीं हैमैं आपको जानती पहचानती नहीं हूं आप कौन हैं जब वह आ जाये तब आना, मुझे बहुत सारे काम करने हैं आप जा सकते । अब दोनों मिले तो उन्होंने कहा सचमुच किसी की घर में होती है जहां प्यार से आवाभगत होती है आदर और सम्मान मिलता है। दूसरी ओर तुम अपने में ही सब कुछ हो। तुम्हा

गांधी फिर से तुम आ जाते

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गांधी की 150 वीं जयंती पर गीत गांधी फिर से तुम आ जाते। हर चेहरे पर खुशियां लाते। पाठ अहिंसा भूल गए जो, उनको फिर से पाठ पढ़ाते, गांधी फिर से तुम आ जाते... बना आज उपहास तुम्हारा, मानव मानव से अब हारा, मोब्लिंचिंग के भाग जगे अब, कमजोरों का छिना सहारा। मानवता की बुझी आग को फिर से तुम इक लौ दिखलाते। गांधी फिर से तुम आ जाते.. नाथू अब फल फूल रहा है। फंदे पर सच झूल रहा है। व्यभिचारी का महिमामंडन आमजनों को शूल रहा है। बिना ढाल बिन खड्ग चलाकर हकदारों को हक़ दिलवाते। गांधी फिर से तुम आ जाते..  देश सभी का है यह अपना। यही सत्य है न एक सपना। पर कुछ का यह काम हुआ अब, देश भूल दुश्मन को जपना। ऐसे गद्दारों को फिर से अब्दुल का तुम विजन दिखाते। गांधी फिर से तुम आ जाते.. हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई। यहां सभी थे भाई भाई। आज बने बैरी आपस में, कैसी है यह विपदा आई। सब भारत माँ की संतानें। आकर फिर सबको समझाते। गांधी फिर से तुम आ जाते..