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मई 17, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्टार जैकलिन फर्नांडिज के साथ पहलीं बार ऑनलाईन डान्स प्रतियागिता

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नयी दिल्ली - डिस्नी़+हॉटस्टार, भारत के सबसे बड़े  प्रिमियम स्ट्रीमिंग मंच ने बॉलीवुड स्टार जैकलिन फर्नांडिज के साथ मिलकर पहलीं बार अनोखी ऑनलाईन डान्स प्रतियागिता “होम डांसर ” की घोषणा की | आज संपूर्ण देश में अधिकतर लोग अपनें घरों में ही बंद है, ऐसी स्थिती में डिस्नी+हॉटस्टार की ओर से नृत्य के चहैते लोगों को ऑन लाइन तथा अपनें घरों में बैठकर ही अपनीं कला पेश करनें का मौका दिया जा रहा है |   मशहूर टीवी कलाकार और यूथ आईकॉन करण वाही इस कार्यक्रम के होस्ट के रूप में हास्य और उर्जा प्रदान करेंगे |  25 मई से डिस्नी़+हॉटस्टार पर पाईलट एपिसोड का प्रसारण करने की तैयारी की जा रही है, इनके साथ ही इस मंच के हकदारों का चयन किया जा रहा है | तो अब इस लॉकडाऊन के समय में भी आज से शुरू होनें वाली प्रक्रिया में शामिल हो जाईए |  अपने उत्साह को साझा करतें हुए जैकलिन फर्नांडिज तथा करण वाही ने भारत के लोगों से अपील की है की अपनें डान्सिंग शूज को पहन कर होम डांसर में शामिल हो | अधिक जानकारी के लिए  https://homedancer.hotstar.com यहा भेट दें, इस समय बोलते हुए बॉलीवुड स्टार जैकलिन फर्नांडिज ने कहा "डिस्न

आयुषी इस साल के अंत तक देशभर में '919' को प्रोमोट करने के लिए भारत आएंगी

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जनवरी 2020 में आयुषी ने अमेरिकन टेलिविज़न स्टार ट्रेक : पिकार्ड में पेल नाम की शानदार भूमिका के साथ अपने अभिनय करियर का आग़ाज़ किया।  स्टार ट्रेक : पिकार्ड के पेल के कैरेक्टर के लिए हज़ारों लोगों के एप्लिकेशन्स आए और उनके से क़ुछ उम्दा कलाकारों का ही आडिशन लिया गया था और उस आडिशन में आयुषी अपने शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के बल पर चयनित की गयी साथ ही अपने अभिनय से लोगों का दिल जितने मे कामयाब भी रही। इस सफलता के अलावे आयुषी अपनी पहली भारतीय फ़िल्म ‘919’ में एक दमदार किरदार में दिखेगी । अमेरिकन लेखक- निर्माता सेंडि साय की इस तेलुगु फ़िल्म का टाइटल ‘919’ है और इस साल के अंत में युनाइटेड स्टेटस और भारत में रिलीज़ किया जाएगा।आयुषी छाबड़ा अपनी सफलता का पुरा श्रेय भारत में हुए अपने परवरिश और अपने पुरे परिवार को देती हैं। उत्तर प्रदेश - ग़ाज़ियाबाद जैसे छोटे शहर से निकल कर हॉलीवुड तक का सफ़र तय करने वाली आयुषी छाबड़ा का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही रोमांचक रहा । उनके जहाँ भी जाती हूँ भारत को अपने दिलो में लिए घुमती हूँ ये उनके अंदर के  मिट्टी के प्रति प्रेम को दर्शाता है  वहीं हॉलीवुड सीरीज़ स्टार ट्रे

एमजी इंडिया एमजी नर्चर प्रोग्राम के तहत 200 छात्रों को मार्केट-फोक्सड स्किल सेट से लैस करेगी

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नई दिल्ली : बड़े पैमाने पर समुदाय की सेवा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए एमजी मोटर इंडिया ने एमजी नर्चर प्रोग्राम की घोषणा की है। यह छात्रों को प्रशिक्षण देने पर केंद्रित अपनी तरह का पहला स्टूडेंट सपोर्ट प्रोग्राम है। यह पहल लगभग 200 छात्रों को मार्केट-फोक्सड स्किल सेट से लैस करेगी और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगी। इस कठिन समय में और विस्तारित लॉकडाउन के समय में एमजी मोटर इंडिया की पहल का उद्देश्य स्टूडेंट कम्युनिटी को स्किल से लैस करना है जो भविष्य में उनके कैरियर संभावनाओं को बढ़ाएगा। इसके बदले में कार निर्माता देश के युवाओं के क्रिएटिव और इनोवेटिव विचारों का लाभ उठाएगा। एमजी नर्चर प्रोग्राम के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट में कॉलेजदेखो अपने इकोसिस्टम के जरिये समर्थन देगा। इसमें एक इंडस्ट्री-फर्स्ट रोबोटिक चयन प्रक्रिया होगी, जिसे दूसरे स्टार्ट-अप इव्यूमी रोबोटिक चयन द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रोग्राम का विशेष आकर्षण उच्च अध्ययन के लिए कुछ छात्रवृत्ति प्रदान करने का है। एमजी मोटर इंडिया के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव चाबा ने इस पहल पर कहा, "इस मुश्किल समय मे

लक्ष्य मेरा है छू लूं मैं नीलगगन का छोर

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सुषमा भंडारी आशा और निराशा के  हिंडोले पर झूलूं  उत्साह और विश्वास के दम पे  मैं लक्ष्य को छू लूं पवन साहस भरूं परों में निकलूं पंख पसार लक्ष्य का बाधक न कोई  जीत मिले या हार कर्म ध्येय हो निश्चित मेरा हो खुशियों की डोर  उम्मीदों के पंख लिये मैं  उडती नभ की ओर  मंजिल पाना दृढ़ निश्चय हो  बाधायें निर्मूल  नैया हो जब सत्य की भव में  शांत रहें सब कूल यक्ष प्रश्न के हल भी मिलते  कोशिश से सब मिलता उद्यम की दहलीज पे हरदम सुन्दर उपवन खिलता खुशियों की कोयल गाये और झूमे मन का मोर उम्मीदों के पंख लिये मैं उडती नभ की ओर जीवन सफल उसी दिन मेरा जब ना मानूं हार सही दिशा में चलती जाउँ हो जाउंगी पार सत्यकर्म और सत्यवचन ही जीवन का आधार ना ही कोई दुख हो जग में  ना कोई लाचार जब ये स्वप्न आँख में तैरें  हो जाउँ भाव - विभोर उम्मीदों के पंख लिये मैं उडती नभ की ओर लक्ष्य मेरा है छू लूं मैं नील - गगन का छोर  ===========================  ( आदमी ) गौरैया जब बना रही थी  मेहनत और प्यार के तिनकों से सुन्दर घर तभी आदमी ने सीख लिया था उसे तोडने का हुनर गौरैया अब भी भटक रही है----------- जब नदी निश्छल अल्हड़-

पंचायत के हर घरों को मिलेंगे 4 मास्क और साबुन

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बिहार ,इसुआपुर ( सारण ) : कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु बिहार सरकार के पत्र के आलोक में पंचम राज्य वित्त आयोग मद से डटरापुरसौली व सहवाँ पंचायत के वार्ड सदस्यों को मुखिया संगम बाबा ने मास्क और साबून उपलब्ध कराया । वहीं  डटरापुरसौली व सहवाँ पंचायत के वार्ड सदस्यों को वार्ड के प्रत्येक घरों के लिये 4 मास्क और 20 रुपये मुल्य के साबून क्रय कर वितरण के लिये दिये गये । वहीं मुखिया संगम बाबा ने कहा की डटरापुरसौली व सहवाँ पंचायत में 14-14 वार्ड हैं जहाँ प्रत्येक घरों में 4 मास्क और 20 रुपये मुल्य के साबून को वार्ड सदस्य हर घरों को देंगे । संगम बाबा ने ये भी कहा की मास्क-साबून के वितरण के समय कोरोना संक्रमण को रोकने को लेकर लोगों को जागरुक भी करना है ताकि कोरोना संक्रमण से हमारा समाज बच सके ।  इसुआपुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न क्वारंटाईन सेन्टरों पर रह रहे प्रवासियों के बीच संगम बाबा ने साबून-मास्क व बिस्किट वितरित किया । मौके पर पंचायत सचिव मिश्रीलाल राय, वार्ड सदस्य सहिदुल्लाह, मोती महतो,  चितरंजन बाबा, अजमत अली, शैलेन्द्र राय, शायरा खातुन, वीआईपी सिंह, अशोक सिंह, अमीत गुप्ता, नौशाद अंसारी, स

पलायन का अर्थ घर छोड़कर जाना नहीं था

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विजय सिंह बिष्ट   जमाने में एक कहावत थी जाओगे जहां लौट के आओगे वहां,यह कहावत जीवन के हर पहलुओं को चरितार्थ करती थी। पलायन का अर्थ घर छोड़कर जाना नहीं था। उसमें अवज्ञा शब्द जो उचित की अवहेलना थी, और  ठोकर खाकर फिर उसी बात को मान लेना लौटकर आना कहलाता था।यह प्रकृति का नियम भी है। जाड़ा,गर्मी  ऋतु परिवर्तन और पुनः लौटना कर आना सृष्टि का लौकिक क्रम है। महामारी के इस तांडव को देखते हुए यह लगता है कि हम लोगों ने जो अपने गांव और घर छोड़ दिए थे जिनकी यादें थूमिल हो चुकी थी,उन राहों को जिन्हें हम भूल चुके थे, आज अपनी जान की बाजी लगाकर  अंन्धनयन हो गांव लौट रहे हैं।  जीवन की अंन्धाधुन्ध इस प्रतियोगिता में कहां हार और जीत है कोई अंदाजा नहीं है। कितने लोग भयातुर होकर छिपे छिपाये मौत को गले लगाकर रास्ते में ही कालकवलित हो गये। फिर भी रेलवे स्टेशनों पर मोटर गाड़ियों और अन्य बाहनों की तलाश में भागे जा रहे हैं। रोग का संक्रमण शत्रु भीड़ में छिपा हुआ है, कब अपना आक्रमण करदे यह वैज्ञानिकों, चिकित्सकों को भी नहीं पता है। हां इतना अवश्य पता है अपनों से भी दूरी बना के रखो चाहे आप जिस स्थिति में हैं।  प