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अप्रैल 28, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

त्याग और कर्मपथ से सबसे बड़ी जनसंख्या वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री तक

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विजय सिंह बिष्ट प्राचीन काल में जो लोग योग धारण करते थे कहते हैं  कि उन्हें एक बार अपने घर भिक्षाटन करने आना आवश्यक था तभी उनका योग सफल माना जाता है। किन्तु जिसको दाता ने सब कुछ दे दिया है वह घर की भिक्षा और अनुमति के बिना भी कर्मपथ पर आगे बढ़ कर राज सिंहासन प्राप्त कर सकता है। उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री इसके प्रतीक हैं। पौड़ी गढ़वाल में यमकेश्वर ब्लाक के एक छोटे से गांव पंचूर में आनंद सिंह बिष्ट सुपुत्र स्व0 जितिन सिंह बिष्ट के घर बालक अज्जू का जन्म हुआ। विद्यालय में अजय सिंह बिष्ट के नाम से आप ने यमकेश्वर से ग्यारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर बीएससी कोटद्वार और ऋषिकेश से सम्पन्न की। प्रखर बुद्धि और ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी तो आप थे ही,यम यस सी के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय का चयन किया , किंतु कोटद्वार में कमरे से सारी सामग्री के साथ मूल प्रमाण पत्रों की चोरी हो जाने से प्रवेश नहीं हो पाया। गोरखपुर में रहकर आप अधिकांश गोरखनाथ मन्दिर जाया करते थे। क्योंकि भक्ति भावना आप में बचपन ही भरी हुई थी। वहां आपको मंदिर के महंत अवैद्यनाथ जी से मिलने का लगातार अवसर मिलता रहा। सुयोग्य बस महंत जी का

पियर रेस्टोरेंट्स को अपनी सेवाएं मुफ्त देगा

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नयी दिल्ली : भारत में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर वेंचर कैटेलिस्ट पोर्टफोलियो कंपनी पियर टेक्नोलॉजी ने रेस्टोरेंट्स को मुफ्त में कॉन्टेक्टलेस डाइन-इन ऑर्डरिंग सुविधा देने की पेशकश की है। इस समय मुंबई स्थित डीप-टेक स्टार्टअप ने नए रेस्टोरेंट्स के लिए लिस्टिंग शुल्क भी माफ कर दिया है। सोशल डिस्टेंसिंग अब नया मानक बनते जा रहा है और पियर द्वारा की गई पहल से ग्राहक बिना किसी शारीरिक संपर्क के अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में ऑर्डर कर सकेंगे। इन फीचर के जरिये ग्राहक कंपनी के किसी भी पार्टनर रेस्टोरेंट में जा सकते हैं, टेबल पर क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते हैं, 3डी ऑग्मेंटेड रियलिटी में मेनू देख सकते हैं, अपने फोन से कई कोर्स ऑर्डर कर सकते हैं और एक ही बार में बिल का भुगतान कर सकते हैं। इससे मेन टचप्वाइंट जैसे मेनू कार्ड और बिल बुक की जरूरत नहीं होगी और सर्वर स्टाफ के साथ बातचीत भी कम करनी होगी। एक यूनिक 3डी मेनू सुविधा से सुसज्जित, पियर उन्हें ऑर्डर देने से पहले डिश की 3डी तस्वीरें देखने की अनुमति देगा, जिससे ग्राहकों को अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। ग्राहक जोमैटो गोल्ड या ड

ट्रक मालिकों व ड्राइवरों के लिए व्हील्सआई की ऑनलाइन सूचना एवं सहायता केंद्र

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ट्रक मालिक व ड्राइवर कभी भी मदद के लिए कम्पनी की खास हेल्पलाइन +91 9990033455 पर कॉल कर सकते हैं। शुरू होने के सिर्फ 20 दिन केे भीतर ही पोर्टल को 20 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है जिसकी बदौलत 2 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिला है। पोर्टल से मदद पाने वाले 90% से ज्यादा लोगों ने माना कि इस से उनकी चिंताओं व समस्याओं का हल मिला है। 95% से ज्यादा लोगों ने पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी को प्रासंगिकता और सहयोग के लिहाज़ से एकदम सटीक पाया। नयी दिल्ली - कोविद-19 महामारी और उसकी वजह से हुए देशव्यापी लोकडाउन को ध्यान में रखते हुए व्हील्सआई (ट्रक मालिकों को सशक्त करने की दिशा में तेज़ी से बढ़ता हुआ एक स्टार्टअप) आगे आकर देश के ट्रांसपोर्ट उद्योग के असली ज़मीनी हीरोज़ का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी के चलते व्हील्सआई ने 'ट्रक मालिक सहायता केंद्र' की शुरुआत की है। इस ऑनलाइन पोर्टल का मुख्य मकसद ट्रांसपोर्ट उद्योग की जरूरी खबरें और सरकारी घोषणाएं ट्रक मालिकों व ड्राइवरों तक पहुंचाना है। यह पोर्टल पूरी तरह से मुफ्त है और 8 भाषाओं में उपलब्ध है जिसमें अंग्रेज़ी व

ऐसे लोगों के लिए दिल्ली सरकार के पास क्या है

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कोविड-19 संकट से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए अंबुजा सीमेंट और एसीसी ने मिलाया हाथ

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नयी दिल्ली - वैश्विक समूह लाफार्ज-होल्सिम के सदस्य के तौर पर कार्यरत अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड और एसीसी लिमिटेड, देश में सीमेंट का निर्माण करने वाली दो प्रमुख कंपनियां हैं, जिन्होंने सम्मिलित रूप से तीन प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों को 3.30 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है, ताकि दिहाड़ी मज़दूरों, प्रवासी मज़दूरों, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों तथा लॉकडाउन के कारण देश भर में फँसे बेघर व बेसहारा लोगों को सहायता प्रदान की जा सके।  अंबुजा सीमेंट और एसीसी साथ मिलकर देश में आपदा राहत कार्यों के लिए प्रसिद्ध तथा सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले एनजीओ, गूँज को अपना सहयोग दे रहे हैं। साथ ही दोनों कंपनियों की ओर से प्रजा फाउंडेशन और मुंबई रोटी बैंक को भी सहायता राशि प्रदान की गई है, जो नोवल कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए पूरे देश में लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से अपनी रोजी-रोटी खो चुके दिहाड़ी मज़दूरों एवं ज़रूरतमंद लोगों को बड़े पैमाने पर सहायता उपलब्ध कराने में जुटे हैं। इसके अलावा, ये दोनों संगठन देश के उन सभी इलाकों में इस बीमारी के चौतरफा रोकथाम और राहत प्रयासों में लगातार सहायता कर रहे