हिमाचल के वेदव्यास परिसर की रजत जयन्ति संस्कृत के उत्कर्ष का प्रतीक

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली । रजत जयन्ति ' का यह अवसर न केवल वेदव्यास परिसर अपितु अपने सभी परिसरों के लिए उत्साह तथा तोष का क्षण है क्योंकि सबका साथ सबका विकास भारतीयता का प्रतीक है । वस्तुत: परिसर का यह ' रजत जयन्ति ' संस्कृत के उत्कर्ष का प्रतीक है । कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देवभूमि हिमाचल प्रदेश में अवस्थित सारस्वत तथा नैसर्गिकता से संपन्न वेदव्यास परिसर के त्रिदिवसीय ' रजत जयन्ति ' के उपलक्ष्य पर मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए सभी छात्र -छात्राओं, अधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ साथ संस्कृत अनुरागियों को बधाई दी
 आगे यह भी कहा कि इस संस्कृत विश्वविद्यालय के सभी परिसरों के सार्वभौमिक उन्नयन की भी मैं अशेष शुभकामनाएं देता हूं । उनका कहना था कि 'रजत जयन्ति ' का यह अवसर न केवल वेदव्यास परिसर अपितु अपने सभी परिसरों के लिए उत्साह तथा तोष का क्षण है क्योंकि सबका साथ सबका विकास भारतीयता का प्रतीक है । वस्तुत: परिसर का यह ' रजत जयन्ति ' संस्कृत के उत्कर्ष का प्रतीक है ।
 इस उपलक्ष्य में आयोजित बच्चों के कार्यक्रमों में छात्रप्रिय कुलपति आचार्य श्रीनिवास वरखेड़ी ने सोत्साहपूर्ण भाग लिया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता चर्चित ज्योतिषशास्त्री तथा इस परिसर के निदेशक प्रो मदन मोहन पाठक और मंच संचालन डा श्रीनाथ द्विवेदी ने किया । ध्यातव्य है कि इस अवसर पर सीएसयू के अनेक जाने माने संस्कृतविदों को एल्युमिनाई के रुप आमंत्रित किये गये हैं । सांस्कृतिक सन्ध्या के रुप में शूद्रक के संस्कृत नाटक - ' मृच्छकटिकम् ' का भी कुलपति की उपस्थिति में बड़ा ही मनभावन मंचन भी किया गया । इसी को आधार बना कर ' उत्सव ' नामक हिन्दी में एक लोकप्रिय फिल्म भी बनी है । इसकी नायिका रेखा तथा नायक शेखर सुमन हैं ।

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