ऑस्कर विजेता फिल्म मेकर्स करेंगे जिफ इंडियन पैनोरमा के फिल्मों का अवार्ड के लिए चयन

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर । पन्द्रहवें जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फैस्टिवल ‘जिफ’के दौरान पहली बार दिखाई जाने वाली इंडियन पैनोरमा की 12 फुल लैंथ विभिन्न भाषाई फिल्मों के लिए अवार्डों का निर्धारण इस बार कई बार के ऑस्कर विजेता फिल्म मेकर्स और उनके साथ टेक्नीकल एक्सपर्ट करेंगे, इनके साथ भारत से जाने-माने फिल्म स्क्रिप्ट राईटर और फिल्म डायरेक्टर/सिनेमाटोग्राफर को जूरी में रखा गया है। जिफ के फाउन्डर डायरेक्टर हनु रोज ने बताया कि ये पहला मौका है जब जिफ में कोरोना के दौरान और उसके बाद देश में बनी जिफ इंडियन पैनोरमा की 12 फिल्मों का अलग से चयन किया गया है।
ये पांच जाने-माने फिल्म मेकर्स तय करेंगे 12 फिल्मों के अवार्ड इन बारह फिल्मों की ज्यूरी में हॉलीवुड के जाने माने विजुअल इफेक्ट्स जिम रेगिल शामिल हैं जिन्हें उनकी फिल्म दी लॉर्ड ऑफ दी रिंग्स ट्रिलॉजी में बेस्ट वीजुअल इफेक्ट्स के लिए तीन ऑस्कर और तीन बॉफ्टा अवार्ड मिल चुका है। दूसरे सदस्य हॉलीवुड के ही स्टीफन केस्टोर हैं। स्टीफन जिम रेगिल की ऑस्कर और बेफ्टा अवार्ड विनिंग फिल्म की वीजुअल इफेक्ट टीम के सक्रिय सदस्य रह चुके हैं। इसी प्रकार फ्रांस के मार्क बाश्चेट पेशे से फिल्म प्रोड्यूसर और सिनेमाटोग्राफर हैं। वो अपनी फिल्मों नो मैन्स लैंड, बिफोर दी रेन्स और अडॉप्टेड सन के लिए जाने जाते हैं। उनकी फिल्म नो मैन्स लैंड को 2001 में ऑस्कर मिल चुका है। इससे पहले मार्क दो बार जिफ में भाग ले चुके है.
ज्यूरी में इसके अलावा दो भारतीय फिल्मकारों ने भी शामिल होने की सहमति दी है। इनमें बॉलीवुड के जाने-माने स्क्रीन प्ले राइटर और टीचर अंजुम रजाबलि हैं. उन्होंने द्रोहकाल (1994), गुलाम (1998), द लीजेंड ऑफ भगत सिंह (2002) और राजनीति (2010), सत्याग्रह (2013), चक्रव्यूह (2012), आरक्षण (2011), राजनीति (2010), अपहरण (2005) जैसी फिल्में लिखी हैं। उन्हें भारतीय पटकथा लेखकों के अधिकारों की पैरवी के लिए भी जाना जाता है। 1988 में प्रदर्शित चर्चित फिल्म पीरवी के जरिए कॉन्स फिल्म फैस्टिवल में कैमरा-डीओर अवार्ड विनिंग फिल्म पीरवी के निर्देशक और सिनेमाटोग्राफर पद्मश्री शाजी एन करूण भी इस ज्यूरी के पांचवें सदस्य होंगे। शाजी एन करूण जिफ द्वारा मनोनीत इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इस प्रकार इस ज्यूरी में फिल्म निर्माण के सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व रखा गया है। इन 12 भारतीय फुल लैंथ फिल्मों की होगी स्क्रीनिंग
चिदम्बरम पालनीप्पन एल की मलयाली फिल्म ‘द वन, द मैनी विदिन वन’, सौम्यजीत मजूमदार की बंगाली, इंगलिश और हिन्दी भषा की फिल्म ‘होमकमिंग’, एम. पदमकुमार की तमिल भाषा की विज़िथिरन, गौतम रामचन्द्र की तमिल भाषा की गार्गी, गिरीश मोहिते की मराठी फिल्म ‘ताथ काना’, राधाकृष्ण पार्थीबन की तमिल तेलगू फिल्म शेडो ऑफ दी नाइट, जोशी मैथ्यू की मलयाली नेस्ट ऑफ़ सोरोज, सीनू रामासामी की तमिल फिल्म मांमनीथम, कार्तिक स्वामीनाथन की तमिल फिल्म मुगीझ़, शेरी और दीपेश टी द्वारा निर्देशित मलयालम फिल्म अवनोविलोना और संजय हजारिका की आसामी फिल्म बोकुल फुलोर डोरे। इन सभी फिल्मों की स्क्रीनिंग 6 से 10 जनवरी के मध्य की जाएगी। इससे पहले नवम्बर से जनवरी तक जिफ की ओर से भारतीय सिनेमा को एकसूत्र में पिरोने और देश विदेश में प्रमोट करने के लिए 12 शहरों में ‘टॉर्च कैम्पेन’ का आयोजन किया जा रहा है. ‘टॉर्च कैम्पेन’ में इन फिल्मों के ट्रेलर दिखाए जाकर इन फिल्मों के प्रति लोगों में अवेयरनैस जगाई जाएगी। एक फिल्म की घोषणा की जाएगी.
किसी एक फिल्म को एक से अधिक अवार्ड भी दिए जा सकते हैं जिफ के प्रवक्ता राजेन्द्र बोड़ा ने बताया कि किसी एक फिल्म को एक से अधिक अवार्ड भी दिए जा सकते हैं और किसी को एक भी नहीं, ये सब चयनकर्ताओं की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही निर्धारित होगा। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक वैश्विक संदेश देने वाली फिल्म के लिए रेड रोज बेस्ट डेब्यूटेंट डायरेक्टर (डायरेक्टर फर्स्ट फिल्म) वेलकम रिगार्ड अवार्ड सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और अभिनेता का पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री अभिनेता का पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ ध्वनि और संपादन पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ छायांकन पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ पोशाक डिजाइन सर्वश्रेष्ठ मेकअप और हेयर स्टाइलिंग फेस्टीवल में भाग लेने के लिए जिफ की वेबसाइट http://jiffindia.org/ पर डेलीगेट्स रजिस्ट्रेशन ओपन है.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अतरलाल कोलारे बने नुन्हारिया मेहरा समाज के प्रांतीय अध्यक्ष

दादा लख्मी फ़िल्म देश ही नहीं बल्कि विश्व में हलचल मचा सकती है - हितेश शर्मा

भोजपुरी एल्बम दिल के लुटल चैना 5 दिसंबर को होगा रिलीज

Delhi MCD Election वार्ड 117 से आप उम्मीदवार तिलोत्तमा चौधरी की जीत की राह आसान

दिल्ली मूल ग्रामीणों की 36 बिरादरी अपनी अनदेखी से लामबंद