किरण नेगी केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशव्यापी आक्रोश

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली.किरण नेगी केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशव्यापी आक्रोश.लोअर और हाई कोर्ट के फैसले के उलट - सुप्रीम कोर्ट का फैसला हतप्रद करने वाला है..! सम्पूर्ण भारतवर्ष में इस फैसले को लेकर मंथन का दौर चल रहा है, की आखिर जो निचली अदालतों ने देखा - वह माननीय सुप्रीम कोर्ट के जजों को क्यों नही दिखाई दिया, जो इस तरह फाँसी पाए तीनों दरिंदगो को कोर्ट ने इस तरह संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया... इन सभी बातों को लेकर उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठित संस्था गढ़वाल हितैषणी के तत्वावधान में गढ़वाल भवन में समाज की एक आपात बैठक आहूत की गई जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समाज के बीच मंथन कर किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जाए...!

गढ़वाल हितैषणी के अध्यक्ष अजय बिष्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उपस्थित जनसमूह के सामने रखा तथा उस पर सभी सदस्यों को उसके कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विचार रखने के लिये आमंत्रित किया..!चर्चा की शुरुआत वरिष्ठ सदस्य जगदीश ममगई द्वारा की गई जिन्होंने समाज में जनजागरण की वकालत की, फैसले के न्यायिक / सामाजिक सहित सभी पहलुओं पर प्रकाश डाला, उनके पश्चात किरण नेगी के केस को प्रमुखता से उठाते रहे, डॉ. विनोद बछैठी ने कहा की हम न्याय पालिका में हम अपना पक्ष सही तरीके से नही रख पाए, पुलिस का रवैया संदेहास्पद रहा, इस केस में दिल्ली सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है, हमे दिल्ली सरकार के कानून मंत्री से इस विषय पर चर्चा कर इसे पुरजोर तरीके से पुनः कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा, साथ ही इस विषय मे सामाजिक एकता को उन्होंने महत्वपूर्ण माना..!

अध्यक्ष अजय बिष् द्वारा कोर्ट केस मोनिटरिंग कमेटी के गठन का प्रस्ताव उपस्थित लोगों के सम्मुख रखा जिसे सभी लोगो ने ध्वनिमत से पारित किया, इस कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संदीप शर्मा जी होंगे, जिनकी अगुवाई में कमेटी इस केस के सभी पहलुओं पर मंथन कर कोर्ट में रिव्यू पेटिशन फाईल करेगी.. अन्य वक्ता में डंडरिया ने एक ही तथ्य पर दो अलग अलग फैसले पर हैरानी जताई, उनके अनुसार कोर्ट में इस केस को और सही तरीके से रखा जा सकता है, पुलिस की भूमिका को भी उन्होंने संदिग्ध माना और कहा की इस पर रिव्यू पेटिशन जल्दी से जल्दी दी जाए  महावीर सिंह राण ने कहा कि यह समाज पर गहरा आघात है, फैसले को समझ कर आगे की रणनीति तय की जाए, पुलिस की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाये, उनके अनुसार यह सब मोनिटरिंग कमेटी तय करेगी..!

श यू एस नेगी ने फैसले से असहमती जताई, और आगे के लिये ईमानदारी से कार्य को अंजाम दिए जाने पर जोर दिया, उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर समय समय पर बैठके होती रहे...! हरीश अवस्थी ने कहा कि इस फैसले से समाज आंदोलित है... वही वरिष्ठ पत्रकार  सुनील नेगी ने इस केस के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डालने के साथ साथ इस केस से शुरू से जुड़ी महिलाओं को भी उपस्थित लोगों से रूबरू कराया, और केस को सामाजिक रूप से और भी मजबूती से जोड़ने की वकालत की, उन्होंने कहा कि नजफगढ़ की स्वर्गीय अनिता नेगी गुप्ता द्वारा इस लड़ाई को समाज के मध्य लाया गया, इस मामले को उजागर किया, तब जाकर यह मामला मीडिया के माध्यम से "अन नोन निर्भया" के नाम से देश के सामने आया...अब यह कानूनी और समाज के मध्य की लड़ाई है, S N शर्म ने कहा कि वे इस फैसले से हताश और हतप्रभ है पर निराश नहीं, इस फैसले से समूचा देश असहमत है..यह न्याय प्रकिया में चूक है कानूनी लड़ाई चलती रहेगी...लीगल सेल की जरूरत पर उन्होंने भी जोर दिया !

भावुक कुसुम कंडवाल भट्ट का वक्तत्व लोगो को झकझोरने वाला था, वह बहुत आहत और भावुकता से भरी हुई थी, तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थी, उन्होंने परिवार की सुरक्षा को अहम माना, वह बहुत उद्धगेलित हुई... परिवार की सुरक्षा अहम, सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता, सूचना अधिकार का प्रयोग..धरना प्रदर्शन को राजनीतिक रूप न दिया जाए..महिला आयोग से सम्पर्क किया जाए..आदि विचार कुसुम जी ने अपने संबोधन के द्वारा सबके सामने रखे ..! सुरेश नेगी  ने - कोर्ट केस, आर्थिक पक्ष, परिवार की सुरक्षा पर विचार रखे तथा स्थानीय राजनैतिक प्रतिनिधियों का सहयोग पर भी जोर दिया !

 दिगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि, फैसले से पूरा देश स्तब्ध, कोर्ट के पहले फैसले के बाद हम लापरवाह हुए, किरण और निर्भया में इतना फर्क क्यो, मीडिया और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण...उन्होंने कहा चूक हुई इस पर विचार किया जाए, जब जागो तभी सवेरा का मंत्र भी उन्होंने सबके सामने रखा ! पवन मैठाणी जी ने नीतीश कटारा, जेसिका लाल के केस का उदाहरण देकर कहा कि अगर ठान लिया जाए तो, दोषी निश्चित ही फाँसी के फंदे में होंगे, चाहे जितने रसूखदार हो, इन केसों में अकेले परिवार ने उन लोगो को सज़ा दिलाई, जो लोग राजनैतिक रसूख रखते थे, और जिन्हें राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था..! वी एन शर्मा  कहा कि बैठक और उपस्थित सदस्यों को आभार, गलत निर्णय किन कारणों से हुआ है, उस पर चर्चा जरूरी, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हम अपना पक्ष पूरी तरह नही रख पाए, और केस से संबंधित फैक्ट सही तरीके से रखा जाना चाहिये, साथ ही क्लाउड फंडिंग का सुझाव, तथा सभी अधिवक्ताओं से चर्चा का सुझाव भी उन्होंने दिया..!

अन्य वक्ताओं में सर्वश्री देवेंद्र बिष्ट, रोशनी चमोली, प्रेमा धोनी,, लक्ष्मण रावत, बृज मोहन उप्रेती, राजेन्द्र चौहान. आदि रहे,पत्रकार सतेंद्र रावत ने लोवर कोर्ट और हाई कोर्ट जज की टिप्पणी का उल्लेख प्रमुखता से किया,प्रकाश जोशी ने केस से जुड़ी नजफगढ़ की मातृ शक्ति - सरोजनी रावत, दीपा नयाल बिष्ट, संयोगिता ध्यानी, लक्ष्मी नेगी आदि का उल्लेख किया. टी एस भंडारी, धीरेंद्र प्रताप सिंह, चारु तिवारी ने भी पूरी गम्भीरता से अपने विचार रखे व लीगल और सामाजिक भूमिका पर जोर देने की वकालत की...!

अंत मे वरिष्ठ अधिवक्ता  संजीव शर्म ने फैसले का कानूनी पक्ष समस्त लोगो के मध्य रखा, और कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करते हुए इस पर सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं, पूर्व जजों व समाज के प्रबुध्द लोगो की राय के पश्चात इस केस में आगे क्या किया जा सकता है, वह कदम निश्चित ही उठाएंगे, साथ ही उन्होंने सामाजिक एकजुटता पर भी जोर दिया..कोर्ट केस मोनिटरिंग कमेटी में पूर्व जजों सहित वर्तमान के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को शामिल करने, व उनके दिशा निर्देश में भविष्य में यह कमेटी कार्य करे, इस दिशा में ही कार्य होंगे, और इसकी जानकारी को लगातार समाज के साथ साझा किया जाएगा..! यह तय हुआ कि, यह एक समाज की बेटी नही, समस्त भारतवर्ष की बेटी है, और उसको न्याय दिलाने के लिये हर माध्यम के सहारे से जनजागरण कर, दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जाएगा...!

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