राजस्थान के रंगकर्मी मोईन अयान पाकिस्तान में देंगे अपनी रंग प्रस्तुति

० आशा पटेल ० 
जयपुर - कला में सरहदे बाधा नही होती या यूं कह लीजिये कि कलाकार के लिए सरहदे नही होती। गंगापुर सिटी में जन्मे और राजस्थान रंगमंच में अभिनेता, रंग समीक्षक व निर्देशक के तौर पर अपनी एक नई पहचान बना चुके मोईन अयान कई अंतराष्ट्रीय मंचो पर अपना हुनर दिखा चुके हैं। अब इसी श्रेणी में पाकिस्तान का नाम भी जुड़ने जा रहा है। पाकिस्तान में आयोजित होने वाले पाकिस्तान इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल 2024 में मोईन अयान द्वारा अभिनीत नाटक भँवरया कालेट का 2 अक्टूबर को मंचन किया जाएगा।
आर्ट काउंसिल ऑफ पाकिस्तान के द्वारा यह महोत्सव कराची में आयोजित किया जा रहा है। इस फेस्टिवल में तुर्की, चीन, जर्मनी, मलेशिया, इंडोनेशिया व बांग्लादेश के कलाकार भी भाग लेंगे। यहां सभी देशों के निर्देशकों द्वारा कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी और अपनी अपनी संस्कृति व अपने काम करने के तरीके से सभी देशों के कलाकारों को परिचय कराया जाएगा। भविष्य में रंगमंच की यात्रा को वैश्विक स्तर पर और आसान बनाने पर चर्चा की जाएगी।
मोईन अयान का कहना है कि मेरे लिए खुशी की बात है कि मेरा नाट्य मंचन फेस्टिवल में 2 अक्टूबर को किया जाएगा। जिस दिन पूरा देश इस दिवस को प्रेम व अहिंसा के दिवस के रूप में मनाता हॉ। गांधी जी पूरे विश्व के थे। गांधी दिवस पर दोनों देशों के कलाकार व दर्शकों का रंग प्रेम और भाईचारा दोनों पड़ोसी मुल्कों के लिए एक यादगार क्षण को गढ़ेगा। 

विभाजन से पहले वाले हिंदुस्तान की उस मिट्टी को गांधी के पथ पर बढ़ने वाले रंगकर्मी, अहिंसा दिवस पर भँवरया कालेट की विशेष प्रस्तुति से सुशोभित करेंगे। दो पड़ोसी मुल्कों के कलाकारों के मध्य जन्म लेते रंग विचार भविष्य में थिएटर की दुनिया से जुड़े रहने वाले कलाकारों के लिए नई दिशाओं को जन्म देंगे।

2016 से मोईन अयान की शुरू हुई रंगमंच की यह यात्रा विश्वभर में अपनी लोक कला व रंग प्रस्तुति को मंचित करने की ओर अग्रसर है। मोईन अयान द्वारा अभिनीत नाटक भँवरया कालेट का पहले भी विश्व स्तर के कई नाट्य महोत्सवों में चयन किया जा चुका है। 2018 में इस नाटक को तैयार होने में पूरे एक वर्ष का समय लगा। इस नाटक के लिए मोईन ने कई महीनों तक प्रोसेस आधारित काम किया और एक नए किरदार को जन्म दिया जो कि यथार्थवादी शैली पर दर्शकों का विश्वास और मजबूत करता है। 

एक वर्ष की मेहनत से रचे गए इस नाटक ने अपना एक उदाहरण लोगो के सामने पेश किया है। पहले भी यह नाटक केन्या, कंबोडिया में अपनी छाप छोड़ चुका है। भँवरया कालेट के अंतरराष्ट्रीय मंचन के बाद आज राजस्थान का प्रत्येक रंगकर्मी वैश्विक स्तर पर नाट्य मंचन की आशा रखता है और धीरे वो आशा व्यवहारिक रूप ले रही है।

रंगमंच में भाषा की बजाय भाव मायने रखते हैं लेकिन यहां के दर्शक भाषा से भी अब अपना संबंध खोज पाएंगे क्योंकि नाटक मिरासी समाज पर आधारित है जो कि कई वर्षों से गायन वादन का कार्य कर रहे हैं। मिरासी वर्ग का एक बड़ा समूह पाकिस्तान में भी पाया जाता है। नाटक के लेखक व निर्देशक सिकंदर है और पूरा नाटक तीन पात्रों के निकट ही घूमता है जफरया, भँवरया और इक़बाल। संगीत पर रहेंगे राजकुमार व प्रकाश परिकल्पना अपूर्वा द्वारा डिज़ाइन की जाएगी।

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